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Odisha Student Suicide :- छात्रा सौम्याश्री की मौत, एक और सपना तड़पते हुए बुझ गया…

Odisha Student Suicide :- (छात्रा सौम्याश्री की मौत) ओडिशा के बालासोर जिले में स्थित फकीर मोहन स्वायत्त महाविद्यालय की एक छात्रा सौम्याश्री बीसी की असमय मौत ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। सौम्याश्री ने अपने ही कॉलेज के एक शिक्षक की लगातार प्रताड़ना से तंग आकर आत्मदाह जैसा खौफनाक कदम उठाया था। बीते सोमवार देर रात उनकी मौत हो गई, और इसके साथ ही एक और युवा जीवन व्यवस्था की संवेदनहीनता की भेंट चढ़ गया।

शिक्षक या उत्पीड़क?

जिन शिक्षकों को विद्यार्थियों का मार्गदर्शक होना चाहिए, जब वही उत्पीड़न का कारण बन जाएं तो शिक्षा का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। बताया गया है कि सौम्याश्री पिछले कुछ महीनों से मानसिक रूप से परेशान थी। उसने कई बार शिक्षक के व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाई, लेकिन न तो कॉलेज प्रशासन ने ध्यान दिया और न ही समाज ने।

मुख्यमंत्री ने जताया दुख, लेकिन सवाल बरकरार

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल दुख जताने से जवाबदेही पूरी हो जाती है? क्या यह सिस्टम की विफलता नहीं है कि एक छात्रा को अपनी बात रखने के लिए खुद को आग लगानी पड़ी?

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समाज कब जागेगा?

हर साल देश में सैकड़ों छात्र-छात्राएं डिप्रेशन, प्रताड़ना और सामाजिक दबाव के चलते आत्महत्या जैसे कदम उठाते हैं। यह घटनाएं महज आंकड़े नहीं, बल्कि समाज के उस अंधेरे कोने की निशानी हैं, जहां संवेदना और जिम्मेदारी का अभाव है। सौम्याश्री की मौत हम सभी के लिए एक चेतावनी है कि अगर अब भी नहीं जागे, तो आने वाले कल में और भी मासूम सपने यूं ही राख हो जाएंगे।

अब क्या होना चाहिए?

कॉलेज और यूनिवर्सिटी स्तर पर एंटी-हैरासमेंट सेल को अनिवार्य बनाया जाए।

छात्राओं की मानसिक स्थिति के लिए काउंसलिंग सिस्टम सशक्त किया जाए।

दोषी शिक्षक पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो और उसे आजीवन शिक्षा से वंचित किया जाए।

समाज को भी यह समझना होगा कि शिकायत करना “कमजोरी” नहीं, “हिम्मत” होती है।

सौम्याश्री अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी चिता से उठता धुआं हमें यह याद दिलाता है कि शिक्षा संस्थानों को ज्ञान का मंदिर बनाने के साथ-साथ संवेदनशीलता का केंद्र भी बनाना होगा।

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Author: Suryodaya Samachar

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