Devshayani Ekadashi :- आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाने वाली देवशयनी एकादशी का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसके साथ ही चातुर्मास की शुरुआत हो जाती है, जो देवउठनी एकादशी तक चलता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने, व्रत रखने और प्रिय भोग अर्पित करने से सुख, समृद्धि और पुण्य की प्राप्ति होती है।
देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु को लगाएं ये 5 विशेष भोग
1. चूरमा
घी, गेहूं के आटे और गुड़ या शक्कर से बना चूरमा भगवान विष्णु का प्रिय भोग माना जाता है।
2. पंचामृत
दूध, दही, घी, शहद और मिश्री से बना पंचामृत भगवान को अर्पित करने के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
भगवान की कैसे करें पूजा, जाने पूरी विधि;
3. खीर
चावल, दूध और चीनी से बनी खीर का भोग लगाने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।
4. तुलसी दल
भगवान विष्णु की पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है। प्रत्येक भोग में तुलसी दल अवश्य अर्पित करें।
5. मौसमी फल और मखाने
केला, नारियल, अनार, सेब सहित सात्विक फल और मखाने का भोग लगाना भी शुभ माना गया है।
पूजा विधि
- सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- व्रत का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती अर्पित करें।
- पीले पुष्प, चंदन, अक्षत और तुलसी दल चढ़ाएं।
- विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
- शाम को भगवान को भोग लगाकर आरती करें और योगनिद्रा का प्रतीकात्मक शयन कराएं।
देवशयनी एकादशी का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, इस दिन से भगवान विष्णु चार माह तक योगनिद्रा में रहते हैं। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। चातुर्मास के दौरान जप, तप, दान, व्रत और सत्संग का विशेष महत्व बताया गया है।
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देवशयनी एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में राजा मान्धाता नामक एक धर्मपरायण और न्यायप्रिय राजा राज्य करते थे। उनके राज्य में प्रजा सुखी थी, लेकिन एक समय लगातार तीन वर्षों तक वर्षा नहीं हुई। सूखे के कारण अकाल पड़ गया और लोग भूख-प्यास से परेशान हो गए।
राजा ने ऋषि-मुनियों से इसका कारण पूछा। तब महर्षि अंगिरा ने उन्हें आषाढ़ शुक्ल एकादशी का व्रत करने की सलाह दी और कहा कि भगवान विष्णु की आराधना से राज्य का संकट दूर हो जाएगा।
राजा मान्धाता ने पूरे राज्य के साथ श्रद्धापूर्वक देवशयनी एकादशी का व्रत किया। भगवान विष्णु उनकी भक्ति से प्रसन्न हुए और शीघ्र ही वर्षा होने लगी। खेत लहलहा उठे, अन्न की भरपूर पैदावार हुई और राज्य में फिर से सुख-समृद्धि लौट आई।
तभी से यह मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक देवशयनी एकादशी का व्रत करता है, उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं, घर में सुख-शांति बनी रहती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
जय श्री हरि विष्णु।
Author: Suryodaya Samachar
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