Mirzapur News :- अहरौरा डोगियां बांध समिति और भारतीय किसान यूनियन (मीरजापुर) की एक संयुक्त बैठक बुधवार को अहरौरा डैम परिसर में आयोजित की गई। बैठक उस समय धरने में तब्दील हो गई, जब किसानों की मुख्य मांग — अहरौरा बांध के मेन कैनाल गेट की मरम्मत और पानी के रिसाव को रोकने — पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
किसानों ने आरोप लगाया कि गेट की खराबी के कारण 80 से 90 क्यूसेक पानी बह रहा है, जिससे सैकड़ों बीघे में बोई गई धान की फसल डूबकर नष्ट हो गई है। वहीं, गेहूं की बुवाई भी अधर में लटक गई है।
🔹 किसानों का आरोप — “मरम्मत के नाम पर लीपापोती”
बैठक में सहायक अभियंता ऋतुराज पांडेय, जूनियर इंजीनियर ओमप्रकाश राय, आनंद बिंद और आनंद मौर्य उपस्थित रहे।
एसडीओ ने बताया कि मेन कैनाल गेट की मरम्मत जून माह में ही 4.5 लाख रुपए की लागत से कराई जा चुकी है। हालांकि किसानों का कहना है कि मरम्मत के बाद भी पानी का रिसाव जारी है और इससे लगातार फसलें बर्बाद हो रही हैं।
इस पर किसानों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि “यदि मरम्मत हो चुकी है तो फिर रिसाव क्यों जारी है? इसका जिम्मेदार कौन है?”
🔹 72 घंटे का धरना और चेतावनी
एसडीओ के असंतोषजनक जवाब के बाद किसानों ने बैठक को 72 घंटे के धरने में बदल दिया।
धरने के दौरान किसान नेताओं ने ऐलान किया कि अगर 72 घंटे के भीतर रिसाव बंद नहीं किया गया, तो 10 और 11 नवंबर को हाईवे जाम किया जाएगा। किसानों ने कहा कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो 11 नवंबर को तहसील चुनार में बड़ी किसान पंचायत बुलाई जाएगी, जिसमें आगे की रणनीति तय होगी।
🔹 बैठक में प्रमुख किसान नेता उपस्थित
इस बैठक में किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह, प्रदेश महासचिव प्रह्लाद सिंह, जिलाध्यक्ष कंचन सिंह फौजी, मुकुटधारी सिंह, स्वामी दयाल सिंह, अनिल सिंह समेत सैकड़ों किसान शामिल हुए।
बैठक की अध्यक्षता लालचंद यादव (मानिकपुर) ने की, जबकि संचालन सिद्धनाथ सिंह ने किया।
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Author: Suryodaya Samachar
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