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अनपरा में बड़ा वित्तीय घोटाला: ग्राहकों की करोड़ों की गाढ़ी कमाई खतरे में

अनपरा में बड़ा वित्तीय घोटाला:-[ब्यूरो चीफ रामेश्वर सोनी] “जागो ग्राहक जागो, जो जागा सो पाया, जो सोया सो खोया”—यह चेतावनी अब सिर्फ एक स्लोगन नहीं रही, बल्कि सोनभद्र जिले के अनपरा क्षेत्र के सैकड़ों ग्राहकों के लिए एक कड़वी हकीकत बन गई है। अनपरा थाना क्षेत्र के औड़ी मोड़ स्थित CMB सिटी म्युचुअल बेनिफिट इंडिया लिमिटेड ब्रांच में एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है।

घटना की जानकारी

पश्चिमी परासी डीह बाबा रोड निवासी भागीरथी गुप्ता (40), जो कि कंपनी का शाखा प्रबंधक बताया जा रहा है, पर आरोप है कि उसने स्थानीय ग्राहकों से लगभग 8 से 10 करोड़ रुपए की रकम विभिन्न योजनाओं में जमा कराई। अब यह संदेह जताया जा रहा है कि यह सारी रकम गबन या डूब गई है।

ग्राहकों का आरोप

प्रभावित लोगों का कहना है कि मैनेजर व उसके सहयोगियों ने उन्हें झूठे वादों, आकर्षक रिटर्न, और निवेश सुरक्षा का झांसा देकर रकम जमा कराई। अब जब निवेश की मियाद पूरी हो गई है या रिटर्न मांगने का समय आया है, तो न तो पैसे लौटाए जा रहे हैं और न ही कोई स्पष्ट जानकारी दी जा रही है।

प्रशासन से उम्मीदें और शातिरों की चालें

चिंतित और आक्रोशित ग्राहक अब प्रशासन और पुलिस से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन इस बीच, आरोपी प्रबंधक और उसके सहयोगी ग्राहकों को नए-नए आश्वासनों, लाभ के लालच और भविष्य की योजनाओं का सपना दिखाकर उन्हें फिर से भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि उनके खिलाफ कोई शिकायत दर्ज न हो।

तेज तर्रार ठग या सफेदपोश अपराधी?

चर्चाओं की मानें तो आरोपी मैनेजर ने बहुत कम समय में असामान्य रूप से संपत्ति, बैंक बैलेंस और सामाजिक प्रभाव हासिल किया। अब उसके निजी व पारिवारिक बैंक खातों, जमीन-जायदाद और अन्य वित्तीय गतिविधियों की गहन जांच की मांग उठ रही है। कई लोग इसे सुनियोजित आर्थिक अपराध मान रहे हैं।

जनता का आक्रोश बढ़ता जा रहा है

ग्रामीण व मध्यवर्गीय निवेशकों की मेहनत की कमाई का इस तरह डूबना एक बड़ी सामाजिक चिंता बन चुकी है। ऐसे मामलों में अक्सर गरीब व अनपढ़ लोग ही सबसे पहले शिकार बनते हैं, जो अपनी पूरी जीवनभर की बचत को इन कंपनियों के हवाले कर देते हैं।

क्या कहता है प्रशासन?

अब तक इस मामले में कोई औपचारिक FIR या प्रशासनिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय पुलिस सूत्रों के मुताबिक शिकायत मिलते ही जांच शुरू की जाएगी।

निष्कर्ष:

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। कोई भी निवेश करने से पहले संस्था की प्रमाणिकता, पंजीकरण और नियमों की पूरी जानकारी लेनी चाहिए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कितना गंभीर कदम उठाता है और ठगे गए ग्राहकों को न्याय मिल पाता है या नहीं।

Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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