Supreme Court on Gadgets :- सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम और संयुक्त परिवार व्यवस्था के लगातार कमजोर होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि बच्चों के पालन-पोषण में माता-पिता और परिवार की भूमिका की जगह मोबाइल, टैबलेट और अन्य गैजेट्स लेने लगेंगे, तो इसका समाज पर दूरगामी और नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
संयुक्त परिवारों के टूटने पर चिंता
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि भारतीय समाज में संयुक्त परिवार व्यवस्था बच्चों के संस्कार, सामाजिक व्यवहार और भावनात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। लेकिन बदलती जीवनशैली और एकल परिवारों की बढ़ती संख्या के कारण यह व्यवस्था धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है।
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गैजेट्स नहीं बन सकते माता-पिता का विकल्प
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि बच्चों को व्यस्त रखने के लिए लगातार मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सौंप देना सही समाधान नहीं है। बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास के लिए परिवार का साथ, संवाद और मार्गदर्शन सबसे अधिक जरूरी है।
परिवार की भूमिका पर दिया जोर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चों को अच्छे संस्कार और जिम्मेदार नागरिक बनाने में माता-पिता, दादा-दादी और परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका अहम होती है। यदि यह जिम्मेदारी पूरी तरह डिजिटल उपकरणों पर छोड़ दी जाएगी, तो भविष्य में समाज को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
संतुलित उपयोग की सलाह
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि तकनीक का उपयोग आवश्यक है, लेकिन बच्चों के जीवन में उसका संतुलित और नियंत्रित इस्तेमाल होना चाहिए। अभिभावकों को बच्चों के साथ समय बिताने और उनकी गतिविधियों पर ध्यान देने की जरूरत है।
Author: Suryodaya Samachar
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