Mokshda Ekadashi :- मोक्षदा एकादशी (Mokshada Ekadashi 2025) इस वर्ष 01 दिसंबर को मनाई जाएगी। इसे मोक्ष दिलाने वाली तिथि माना जाता है। विश्वास है कि इस दिन भगवान विष्णु की सच्चे भाव से पूजा और उपवास करने से जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है। साथ ही यदि इस अवसर पर कुछ विशेष उपाय किए जाएं, तो जीवन में शांति और सुख की प्राप्ति होती है। आइए इन उपायों के बारे में जानते हैं।
HighLights
1. मोक्षदा एकादशी अत्यंत शुभ और पवित्र मानी जाती है।
2. यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है।
3. इस दिन व्रत रखकर अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
मोक्षदा एकादशी 2025 का महत्व
मोक्षदा एकादशी हिंदू धर्म के प्रमुख और शुभ व्रतों में से एक है। यह एकादशी मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष में आती है और इस बार 01 दिसंबर को मनाई जाएगी। ‘मोक्षदा’ का अर्थ है—मोक्ष प्रदान करने वाली। मान्यता है कि इस दिन पूरे मन से भगवान विष्णु की पूजा और उपवास करने से व्यक्ति को जन्म-मरण से मुक्ति और पाप-क्षय का फल मिलता है। इस दिन किए गए उपाय जीवन में सकारात्मकता और सुख-शांति लाते हैं।
गीता से जुड़े उपाय (Geeta se Jude Upay)
1. गीता का पाठ
मोक्षदा एकादशी एवं गीता जयंती पर श्रीमद्भगवद्गीता का पूर्ण पाठ करना शुभ माना गया है। यदि पूरा पाठ संभव न हो तो कम से कम अध्याय 11 का पाठ अवश्य करें।
2. गीता का दान
इस पुण्य तिथि पर किसी ब्राह्मण या मंदिर में भोजन कराएं और श्रीमद्भगवद्गीता का दान करें। यह कर्म व्यक्ति को ज्ञान, प्रकाश और मोक्ष की दिशा में ले जाता है।
3. विशेष भोग अर्पित करें
भगवान कृष्ण को तुलसी मिश्रित मिश्री का भोग लगाएं। भोग अर्पित करते समय गीता के किसी भी उपदेश या श्लोक का ध्यान करें या जप करें।

मोरपंख के चमत्कारी उपाय (Perform Remedies Related To Peacock Feathers)
1. पूजा में स्थापित करें
पूजा घर में श्रीकृष्ण जी के साथ एक या तीन मोरपंख रखें। एकादशी के दिन इन्हें जल से शुद्ध कर धूप-दीप दिखाएं।
2. धन वृद्धि के लिए उपाय
आर्थिक समस्या दूर करने के लिए पूजा के बाद मोरपंख को तिजोरी या धन स्थान पर रख दें। ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और धन आगमन बढ़ता है।
3. घर में सकारात्मकता के लिए
मुख्य द्वार पर मोरपंख लगाने से नकारात्मक ऊर्जा हटती है और घर में सौभाग्य, शांति और समृद्धि आती है।
पूजा विधि और पारण
मोक्षदा एकादशी के दिन प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण का पूजन करें। पूजा में धूप, दीप, फल, पीले फूल और तुलसी पत्र अवश्य शामिल करें। व्रत के नियमों का पालन करें और चाहें तो फलाहार कर सकते हैं।
अगले दिन द्वादशी तिथि पर ब्राह्मणों को भोजन कराकर तथा दान देकर व्रत का पारण करें। इससे व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होता है।
मनुष्य जीवन का महत्व: हरे कृष्ण महामंत्र से आत्मा की शुद्धि और मुक्ति का सरल मार्ग
Author: Suryodaya Samachar
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