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मिर्जापुर :- गुसाईं श्री विट्ठलनाथ जी प्राकट्योत्सव 2024: चार दिवसीय आयोजन, जानें पूरी जानकारी

चुनार( मिर्जापुर ) :-  (रिपोर्टर तारा त्रिपाठी) वल्लभ संप्रदाय के अनुयायियों के लिए एक विशेष अवसर प्रदान करते हुए, चरणाट धाम में इस वर्ष 23 से 26 दिसंबर तक गुसाईं श्री विट्ठलनाथ जी का चार दिवसीय प्राकट्योत्सव भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन वैष्णवजनों के लिए न केवल धार्मिक अपितु सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्राकट्य महोत्सव का इतिहास:

गुसाईं श्री विट्ठलनाथ जी का जन्म विक्रम संवत 1572 में चुनार के चरणाट धाम में हुआ था। यह स्थान वल्लभ संप्रदाय के प्रवर्तक श्री वल्लभाचार्य जी की साधना स्थली भी रही है। इसे वैष्णवजन ‘गुप्त वृंदावन’ मानते हैं। इस धाम की वास्तुकला और आध्यात्मिक ऊर्जा, इसे एक अद्वितीय तीर्थस्थल बनाती है।

चार दिवसीय कार्यक्रम:

यह प्राकट्योत्सव षष्ठपीठाधीश्वर श्री श्यामनोहर जी महाराज के निर्देशन में श्री मुकुंद गोपाल सेवा संस्थान चौखंभा, वाराणसी द्वारा आयोजित किया जा रहा है।

23 दिसंबर: वाराणसी के चौखंभा मंदिर से चुनार तक पैदल शोभायात्रा।

24 दिसंबर: श्रीगुसाईंजी व श्रीमहाप्रभुजी के तिलक दर्शन, बधाई गीत व संकीर्तन सत्संग।

25 दिसंबर: प्रातः महाराज श्री के केसर स्नान, अखिल भारतीय वैष्णव सम्मेलन, विद्वानों के प्रवचन व नंद महोत्सव का आयोजन।

26 दिसंबर: सरस्वती शिशु मंदिर में छात्रों की सहायता हेतु विशेष कार्यक्रम।

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चरणाट धाम की महिमा:

तीन आंगनों और दो विशाल जलाशयों से युक्त यह धाम न केवल वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है बल्कि वल्लभ संप्रदाय के अनुयायियों की श्रद्धा का केंद्र भी है। यहां वर्षभर देश-विदेश से हजारों तीर्थयात्री दर्शन के लिए आते हैं।

संप्रदाय की धरोहर:

श्री गुसाईं श्री विट्ठलनाथ जी भारतीय दर्शन और संस्कृति के महान पोषक माने जाते हैं। उनकी शिक्षाएं आज भी वल्लभ संप्रदाय के अनुयायियों को प्रेरणा देती हैं। यह प्राकट्योत्सव इस धरोहर को संरक्षित और प्रचारित करने का सशक्त माध्यम बनेगा।

इस भव्य आयोजन में शामिल होकर वैष्णवजन न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करेंगे, बल्कि संप्रदाय की समृद्ध परंपराओं से भी जुड़ेंगे।

 

Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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