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Varanasi news :- वाराणसी में मनाया गया अन्नकूट महापर्व

Varanasi news :- वाराणसी में अन्नकूट महापर्व: बाबा विश्वनाथ और अन्नपूर्णा मंदिर में सवा पाँच सौ कुंतल का प्रसाद, उमड़े श्रद्धालु

रिपोर्ट: अजय कुमार गुप्ता

वाराणसी(उत्तर प्रदेश):- वाराणसी में दीपावली के बाद अन्नकूट महापर्व को पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ और अन्नपूर्णा मंदिर में आकर्षक झाँकियाँ सजाई गईं और सवा पाँच सौ कुंतल का भोग अर्पित किया गया। बाबा विश्वनाथ और माता अन्नपूर्णा के दर्शनों के लिए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। अन्नकूट के पावन अवसर पर मंदिरों में 56 प्रकार के विशेष व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया।

श्री अन्नपूर्णा मंदिर में विशेष भोग

अन्नपूर्णा मंदिर में अन्नकूट महापर्व के दौरान पाँच सौ ग्यारह कुंतल का प्रसाद तैयार किया गया, जिसमें छप्पन प्रकार के व्यंजन शामिल थे। मंदिर की एक दीवार को विशेष रूप से इक्कीस कुंतल लड्डुओं से सजाया गया था। इसके अलावा पूरे मंदिर में पाँच कुंतल से अधिक लड्डू लगाए गए, जो देखने में अत्यंत सुंदर और मनोहारी थे। इस महाप्रसाद में सूरन के लड्डू, चालीस प्रकार की मिठाइयाँ और सत्रह प्रकार के नमकीन शामिल थे। अन्नपूर्णा मंदिर के इस विशेष आयोजन में श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण का भी प्रबंध किया गया था।

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श्री काशी विश्वनाथ धाम में विशेष श्रृंगार

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में इस बार चौदह कुंतल मिष्ठानों से महादेव का विशेष श्रृंगार किया गया। इसके तहत मंदिर में आठ कुंतल लड्डुओं से सजावट की गई, जिससे पूरे परिसर में भक्ति और आनंद का वातावरण बन गया। इस अवसर पर भगवान शिव का विशेष श्रृंगार विभिन्न प्रकार की मिठाइयों और व्यंजनों से किया गया। मध्यान्ह आरती के बाद भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया, जो सभी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।

प्रसाद निर्माण में कारीगरों का योगदान

अन्नकूट महाप्रसाद को तैयार करने के लिए दशहरा से ही अन्नपूर्णा दरबार में काम शुरू कर दिया गया था। लगभग पचासी कारीगरों ने मिलकर इस महाप्रसाद को तैयार किया, जो कई पीढ़ियों से यहाँ प्रसाद बनाने का कार्य कर रहे हैं। कारीगरों ने बताया कि उनके परिवार की तीन पीढ़ियाँ इस मंदिर में प्रसाद निर्माण का कार्य करती आई हैं। उन्होंने विशेष स्वाद और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए परंपरागत विधियों का उपयोग किया, ताकि श्रद्धालुओं को विशेष प्रसाद का अनुभव हो सके।

अन्नकूट महापर्व का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

इस पर्व से जुड़ी मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव काशी में वास करने आए थे और माता अन्नपूर्णा से भिक्षा माँगकर काशीवासियों को तृप्त करने का आशीर्वाद प्राप्त किया था। इस दिन को लेकर यह मान्यता भी है कि भगवान शिव के इस आशीर्वाद से काशी में कोई भी भूखा नहीं सोएगा। इस परंपरा का पालन करते हुए हर साल अन्नकूट महापर्व का आयोजन किया जाता है, जो सैकड़ों वर्षों से काशीवासियों के बीच विशेष श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक बना हुआ है।

अन्नकूट महापर्व की तैयारियाँ और आयोजन

अन्नकूट महापर्व को सफलतापूर्वक आयोजित करने के लिए मंदिर प्रशासन ने विशेष तैयारियाँ की थीं। सुरक्षा और सुविधाओं का ध्यान रखते हुए, प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया। इसके अलावा, प्रसाद वितरण के लिए अलग-अलग स्थानों पर व्यवस्था की गई, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इस दौरान मंदिर के चारों ओर भक्तों का तांता लगा रहा, जो भगवान शिव और माता अन्नपूर्णा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पहुंचे थे।

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श्रद्धा और भक्ति का अनोखा संगम

अन्नकूट महापर्व पर वाराणसी के मंदिरों में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है। इस पर्व के माध्यम से भक्त भगवान शिव और माता अन्नपूर्णा की कृपा प्राप्त करते हैं। मंदिरों में की गई भव्य सजावट, लड्डुओं और अन्य मिठाइयों की विशेष व्यवस्था और झाँकियाँ इस पर्व को और भी आकर्षक बना देती हैं। श्रद्धालु इस महाप्रसाद को प्राप्त कर धन्य महसूस करते हैं और इस पर्व को वाराणसी में श्रद्धा और भक्ति का एक अनोखा संगम मानते हैं।

अन्नकूट महापर्व वाराणसी की प्राचीन परंपरा और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दिन का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी है। हर साल अन्नपूर्णा मंदिर और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में आयोजित होने वाला यह पर्व न केवल श्रद्धालुओं के लिए एक पवित्र अवसर है, बल्कि यह उनके जीवन में सुख, शांति और संतोष का प्रतीक भी बन चुका है। इस वर्ष भी इस पर्व पर उमड़ी भक्तों की भीड़ ने यह साबित कर दिया कि सनातन परंपराएँ आज भी जनमानस के बीच गहरी जड़ें जमाए हुए हैं।

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Author: Suryodaya Samachar

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