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Unnao news : इसी माह मोहर्रम में हुई थी इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत…..

Unnao news बांगरमऊ, उन्नाव। नगर के मोहल्ला गुलाम मुस्तफा (गोल कुआं) की हुसैनी मस्जिद के पेश इमाम हाफिज व मौलाना मोईनुद्दीन कादरी ने मस्जिद में नमाज के बाद लोगों को खिताब करते हुए माहे मोहर्रम की फजीलत बयान करते हुए कहा कि इस्लाम धर्म में विश्वास करने वाले लोगों का मुहर्रम एक प्रमुख महीना है। इस माह की उनके लिए बहुत विशेषता और महत्ता है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार मुहर्रम हिजरी संवत्का प्रथम मास है। पैगंबर मुहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन एवं उनके साथियों की शहादत इस माह में हुई थी।

मुहर्रम सब्र का, इबादत का महीना है। इसी माह में पैगंबर हजरत मुहम्मद स० अलैह० ने पवित्र मक्का से पवित्र नगर मदीना में हिजरत की थी यानी कि आप स० अलैह० मक्का से मदीना मुनव्वरा तशरीफ लाए। मुहर्रम में लोग रोजे रखते हैं। पैगंबर मुहम्मद स० अलैह० के नाती की शहादत तथा करबला के शहीदों के बलिदानों को याद किया जाता है। कर्बला के शहीदों ने इस्लाम धर्म को नया जीवन प्रदान किया था। तमाम लोग इस माह में पहले 10 दिनों के रोजे रखते हैं। जो लोग 10 दिनों के रोजे नहीं रख पाते, वे मोहर्रम की 9 और 10 तारीख के रोजे रखते हैं। इस दिन जगह-जगह पानी के प्याऊ और शरबत की छबील लगाई जाती है। इस दिन पूरे देश में लोगों की अटूट आस्था का भरपूर समागम देखने को मिलता है। कर्बला यानी आज का इराक, जहां सन् 60 हिजरी को यजीद इस्लाम धर्म का खलीफा बन बैठा। वह अपने वर्चस्व को पूरे अरब में फैलाना चाहता था जिसके लिए उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी पैगम्बर मुहम्मद के खानदान के इकलौते चिराग इमाम हुसैन, जो किसी भी हालत में यजीद के सामने झुकने को तैयार नहीं थे।

इस वजह से सन् 61 हिजरी से यजीद के अत्याचार बढ़ने लगे। ऐसे में इमाम हुसैन अपने परिवार और साथियों के साथ मदीना से इराक के शहर कुफा जाने लगे लेकिन रास्ते में यजीद की फौज ने कर्बला के रेगिस्तान पर इमाम हुसैन के काफिले को रोक दिया। वह 2 मुहर्रम का दिन था, जब हुसैन का काफिला कर्बला के तपते रेगिस्तान पर रुका। वहां पानी का एकमात्र स्रोत फरात नदी थी, जिस पर यजीद की फौज ने 6 मुहर्रम से हुसैन के काफिले पर पानी के लिए रोक लगा दी थी।

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Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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