
Sugar Price Hike :- देश में चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच एथनॉल नीति को लेकर बहस तेज हो गई है। एक तरफ आरोप है कि पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण बढ़ाने के लिए गन्ने के इस्तेमाल से चीनी का उत्पादन प्रभावित हुआ और कीमतें बढ़ीं। वहीं विशेषज्ञों और सरकार का कहना है कि मौजूदा संकट की मुख्य वजह कम चीनी उत्पादन, मौसम से फसल को नुकसान और बाजार में स्टॉकिंग है।
गन्ने का उत्पादन घटा तो चीनी पर पड़ा असर
सरकार के ताजा अनुमान के मुताबिक मौजूदा सीजन में चीनी उत्पादन करीब 306 लाख टन रह सकता है, जो राज्यों के शुरुआती अनुमान 343 लाख टन से लगभग 11 प्रतिशत कम है। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में मौसम और फसल संबंधी समस्याओं ने उत्पादन के अनुमान को प्रभावित किया है।
क्या एथनॉल भी जिम्मेदार है?
एथनॉल नीति का असर पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता, क्योंकि गन्ने और उससे जुड़े उत्पादों का एक हिस्सा एथनॉल बनाने में इस्तेमाल होता है। इसी वजह से सरकार ने भी चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए गन्ने के एथनॉल इस्तेमाल को सीमित करने जैसे विकल्पों पर विचार किया है।
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लेकिन सरकार और कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि इस बार चीनी की कीमत बढ़ने का मुख्य कारण एथनॉल के लिए गन्ने का डायवर्जन नहीं, बल्कि अपेक्षा से कम उत्पादन और घटता स्टॉक है।
त्योहारों से पहले बढ़ी मांग ने भी दबाव बढ़ाया
गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों से पहले चीनी की मांग बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में कम उत्पादन और सीमित घरेलू स्टॉक के बीच बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना है। सरकार कीमतों को नियंत्रित करने के लिए स्टॉक लिमिट और संभावित आयात जैसे कदमों पर भी विचार कर रही है।
तो आखिर असली वजह क्या?
मौजूदा आंकड़ों को देखें तो चीनी संकट को केवल एथनॉल नीति से जोड़ना सही तस्वीर नहीं देता। कम उत्पादन, मौसम से फसल को नुकसान, घटता स्टॉक, त्योहारों से पहले बढ़ती मांग और बाजार में जमाखोरी/स्टॉकिंग—इन सभी कारणों ने मिलकर कीमतों पर दबाव बढ़ाया है। एथनॉल नीति इस बहस का एक हिस्सा जरूर है, लेकिन उपलब्ध सरकारी और विशेषज्ञ आकलनों में इस समय कम उत्पादन प्रमुख कारणों में सामने आ रहा है।
Author: Suryodaya Samachar
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