
Himalayan Glaciers :- हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से ग्लेशियरों से बनी झीलों का आकार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन झीलों में पानी का दबाव लगातार बढ़ने पर अचानक झील टूटने और बाढ़ आने का खतरा पैदा हो सकता है। ऐसी स्थिति में पहाड़ी इलाकों के साथ-साथ नदियों के किनारे बसे क्षेत्रों को भी भारी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
पिथौरागढ़ पर सबसे ज्यादा खतरा
उत्तराखंड का पिथौरागढ़ जिला इस संभावित आपदा को लेकर बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। जिले का भौगोलिक क्षेत्र पहाड़ों और ग्लेशियरों के करीब होने के कारण यहां ग्लेशियल झीलों में होने वाले बदलाव पर लगातार नजर रखना जरूरी है।
ग्लेशियर पिघलने से क्यों बढ़ रहा खतरा?
बढ़ते तापमान के कारण हिमालयी ग्लेशियर तेजी से पीछे हट रहे हैं। ग्लेशियरों के पिघलने से उनके आसपास पानी जमा होकर नई झीलें बन रही हैं या पहले से मौजूद झीलों का विस्तार हो रहा है। यदि किसी झील की प्राकृतिक रोकथाम कमजोर पड़ती है और पानी अचानक बाहर निकलता है, तो तेज बहाव के साथ बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
समय रहते निगरानी जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, ग्लेशियल झीलों की नियमित निगरानी, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और समय रहते चेतावनी व्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी है। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए ऐसी झीलों की स्थिति पर नजर रखना भविष्य में बड़े नुकसान को रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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Author: Suryodaya Samachar
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