
Lunar Eclipse :- साल 2026 का अगला चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को होने जा रहा है। इस दौरान चंद्रमा का करीब 96 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की छाया में आ जाएगा, जिससे यह गहरे लाल रंग का दिखाई दे सकता है। इसी वजह से इसे ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है।
कब होगा चंद्र ग्रहण?
यह चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को होगा। खगोलीय घटना उस समय होती है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा की सतह पर पड़ती है। चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा के दौरान ही संभव होता है।
कहां-कहां दिखाई देगा?
इस चंद्र ग्रहण को उत्तर और दक्षिण अमेरिका के बड़े हिस्सों में देखा जा सकेगा। यहां लोगों को ग्रहण का पूरा चरण देखने का अवसर मिलेगा।
इसके अलावा यूरोप, अफ्रीका और पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में भी ग्रहण का आंशिक नजारा दिखाई देगा। अनुमान के मुताबिक दुनिया की करीब 44 प्रतिशत आबादी इस खगोलीय घटना को किसी न किसी रूप में देख सकेगी।
🌕 चंद्र ग्रहण क्या होता है?
चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है। जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी सूर्य तथा चंद्रमा के बीच आ जाती है, तब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इसी घटना को चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) कहा जाता है।
चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा के दिन ही हो सकता है। जब चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया में प्रवेश करता है तो वह लाल या नारंगी रंग का दिखाई दे सकता है, जिसे आमतौर पर ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।
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📅 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण का समय
भारतीय समयानुसार ग्रहण सुबह 6:53 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक रहेगा।
| ग्रहण का चरण | समय (IST) |
|---|---|
| उपच्छाया ग्रहण शुरू | सुबह 6:53 बजे |
| आंशिक ग्रहण शुरू | सुबह 8:04 बजे |
| अधिकतम ग्रहण | सुबह 9:43 बजे |
| आंशिक ग्रहण समाप्त | सुबह 11:22 बजे |
| उपच्छाया ग्रहण समाप्त | दोपहर 12:32 बजे |
🇮🇳 क्या भारत में दिखाई देगा चंद्र ग्रहण?
नहीं। भारत में 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण दिखाई नहीं देगा। ग्रहण के सभी प्रमुख चरण भारत में दिन के समय होंगे और उस दौरान चंद्रमा आकाश में दिखाई नहीं देगा।
भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका और प्रशांत महासागर के आसपास के ‘पैसिफिक रिम’ क्षेत्र में भी दिन के उजाले के कारण इसे देखने का अवसर नहीं मिलेगा।
🪢 रक्षाबंधन के कारण बढ़ी दिलचस्पी
यह चंद्र ग्रहण रक्षाबंधन के आसपास पड़ रहा है, जिसके चलते लोगों में ग्रहण की तारीख, समय और इसके प्रभाव को लेकर खास दिलचस्पी देखी जा रही है। हालांकि, भारत से ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण यहां इसे प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर नहीं होगा।
क्यों लाल दिखाई देता है चंद्रमा?
पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की गहरी छाया यानी उम्ब्रा में प्रवेश कर जाता है। पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरने वाली सूर्य की रोशनी चंद्रमा तक पहुंचती है, जिससे चंद्रमा लाल या नारंगी रंग का नजर आ सकता है। इसे ही आमतौर पर ब्लड मून कहा जाता है।
चंद्र ग्रहण कितने प्रकार के होते हैं?
पूर्ण चंद्र ग्रहण: चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की गहरी छाया में प्रवेश करता है।
आंशिक चंद्र ग्रहण: चंद्रमा का केवल एक हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया में आता है।
उपच्छाया चंद्र ग्रहण: चंद्रमा पृथ्वी की हल्की बाहरी छाया से गुजरता है। यह ग्रहण बेहद हल्का होता है और इसे नग्न आंखों से पहचानना मुश्किल हो सकता है।
Author: Suryodaya Samachar
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