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Sonbhadra news :- एनएच-39: 13 वर्षों से अधूरी सड़क पर सांसद ने तय की 30 जून की डेडलाइन, अब बाकी बचे 48 दिन

Sonbhadra news:-[सोनभद्र से ब्यूरो चीफ रामेश्वर सोनी] सीधी-सिंगरौली नेशनल हाईवे 39 के फोरलेन निर्माण कार्य की रफ्तार अब भी बेहद धीमी बनी हुई है। लगभग 13 वर्षों से अधूरी इस 85 किलोमीटर लंबी सड़क को लेकर अब फिर से उम्मीदें जागी हैं, जब क्षेत्रीय सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने बीते माह सख्त रुख अपनाते हुए 30 जून 2025 तक कार्य पूर्ण करने की अंतिम डेडलाइन तय की है। हालांकि अब यह देखना बाकी है कि यह निर्देश जमीनी हकीकत में कितना असर डाल पाएगा।

लंबे समय से लटकी योजना, अब तक 70% कार्य अधूरा

एनएच-39 का फोरलेन कार्य 2012-13 में प्रारंभ हुआ था, लेकिन आज तक यह पूरी तरह से पूरा नहीं हो पाया है। निर्माणाधीन सड़क के कई हिस्सों में काम ठप पड़ा है। खासकर सजहर जंगल, जोगिनी, चौराडाड़, कर्थुआ, कसर, गोरबी और मोरवा मार्ग में सड़क निर्माण और घाट कटिंग के कार्य अधूरे हैं। कई जगहों पर पुल-पुलियों का निर्माण अभी भी आरंभिक अवस्था में है।

सांसद और उप मुख्यमंत्री की सक्रियता, फिर भी नहीं दिख रहा असर

सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने हाल ही में एमपीआरडीसी और ठेकेदार को चेताते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि 30 जून से पहले सड़क का कार्य पूरा किया जाए। इसके पूर्व उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला भी गोपद नदी पुल सहित अन्य स्थलों का निरीक्षण कर चुके हैं और बार-बार निर्माण कार्य को गति देने के निर्देश देते रहे हैं। फिर भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

गोपद पुल पर बनते फोरलेन में लग सकता है साल भर का समय

सीधी और सिंगरौली के मध्य स्थित गोपद नदी पर बन रहे फोरलेन पुल का निर्माण अभी प्रारंभिक अवस्था में ही है। टू-लेन पुल किसी तरह छह माह पहले तैयार हुआ था, परंतु फोरलेन का महज 20% कार्य ही पूरा हो पाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पुल को पूर्ण रूप से तैयार होने में कम से कम एक वर्ष का समय और लगेगा।

मॉनिटरिंग में लापरवाही बनी सबसे बड़ी बाधा

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विशेषज्ञों का मानना है कि एमपीआरडीसी द्वारा परियोजना की निगरानी और नियंत्रण में भारी चूक हुई है। यदि समय-समय पर कठोर निरीक्षण और कार्रवाई की जाती, तो यह परियोजना वर्षों पूर्व ही पूर्ण हो सकती थी।

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क्या तय डेडलाइन पर कार्य होगा पूरा?

30 जून की डेडलाइन में अब सिर्फ 48 दिन शेष हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या एमपीआरडीसी और संविदाकार मिलकर तय समयसीमा में शेष कार्य पूर्ण कर पाएंगे या यह डेडलाइन भी पूर्व की तरह एक और तारीख बनकर रह जाएगी।

निष्कर्ष:

एनएच-39 केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि क्षेत्र के लाखों लोगों की जीवनरेखा है। यदि यह सड़क पूरी तरह चालू हो जाए, तो सीधी और सिंगरौली के बीच आवागमन, व्यापार, स्वास्थ्य और शिक्षा के अवसरों में क्रांतिकारी सुधार आ सकता है। जनता अब इस बार सरकार और अधिकारियों से ठोस नतीजों की अपेक्षा कर रही है, सिर्फ वादों की नहीं।

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Author: Suryodaya Samachar

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