शिवहर रजिस्ट्री कार्यालय :- शिवहर जिला निबंधन कार्यालय एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता नवनीत कुमार झा ने इस कार्यालय पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। एक आरटीआई (सूचना का अधिकार) के तहत हुए खुलासे के बाद उन्होंने प्रेस को संबोधित करते हुए प्रशासन और सरकार की कड़ी आलोचना की।
आरटीआई से खुली पोल, उठी जांच की मांग
राजद नेता नवनीत झा का कहना है कि हाल ही में दायर की गई आरटीआई में ऐसे तथ्यों का खुलासा हुआ है जो इस कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करते हैं। उन्होंने कहा कि निबंधन कार्यालय में आम जनता से अवैध रूप से पैसे वसूलना, फर्जी दस्तावेजों पर रजिस्ट्री करना और दलालों की मिलीभगत से नियमों की अनदेखी आम बात हो गई है। उन्होंने इस मामले में उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग की है।
बिहार सरकार पर निशाना, ‘निकम्मी सरकार’ बताया
प्रेस को संबोधित करते हुए झा ने कहा, “बिहार का कोई भी कार्यालय ऐसा नहीं है जहां भ्रष्टाचार न हो।” उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार सरकार भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देती है और प्रशासन की लापरवाही से आम जनता पीड़ित है। झा ने कहा कि सरकार केवल आंकड़ों में पारदर्शिता का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है।
राजद की भूमिका: लगातार आवाज उठाने का दावा
नवनीत झा ने जोर देते हुए कहा कि राष्ट्रीय जनता दल हमेशा से भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष करता आया है। उन्होंने पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव का हवाला देते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने हर फोरम पर जनता की आवाज को बुलंद किया है। “हमारी लड़ाई किसी पार्टी या व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था में घुसे भ्रष्टाचार के खिलाफ है,” उन्होंने कहा।
जनता के सब्र का बांध टूटा: बदलाव की पुकार
झा ने यह भी दावा किया कि अब जनता में आक्रोश है और वह बदलाव चाहती है। उन्होंने कहा कि “बिहार की महान जनता अब इस निकम्मी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए तैयार बैठी है।” उन्होंने युवाओं, किसानों और गरीबों से अपील की कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ खामोश न रहें और लोकतांत्रिक तरीके से बदलाव लाएं।
निष्कर्ष: क्या होगी कार्रवाई या फिर चुप्पी?
शिवहर के निबंधन कार्यालय पर भ्रष्टाचार के आरोप कोई नए नहीं हैं, लेकिन आरटीआई से हुए हालिया खुलासे और राजद नेता नवनीत झा के तीखे तेवरों ने इस मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। अब सवाल यह है कि क्या बिहार सरकार इन आरोपों पर संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगी या फिर यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
Author: Suryodaya Samachar
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