
Nepal flood :- नेपाल में ग्लेशियल झील फटने के बाद अचानक आई बाढ़ की घटना ने हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस घटना ने भारत के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है। विशेषज्ञों की चिंता इसलिए बढ़ी है क्योंकि हिमालयी क्षेत्र में करीब 200 ग्लेशियल झीलें ऐसी बताई जा रही हैं, जिनके भविष्य में फटने से बड़े पैमाने पर तबाही का खतरा हो सकता है।
ग्लेशियल झील फटने से अचानक बढ़ता है पानी
ग्लेशियल झीलें ग्लेशियरों के पिघलने से बनने वाले जलाशय हैं। तापमान बढ़ने के साथ जब ग्लेशियर तेजी से पिघलते हैं तो इन झीलों में पानी का स्तर बढ़ सकता है। झील की प्राकृतिक या बर्फ से बनी दीवार कमजोर होने पर अचानक टूटने की स्थिति में भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर तेजी से बहता है।
इसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहा जाता है। कुछ ही समय में आने वाली ऐसी बाढ़ नदी घाटियों और निचले इलाकों में भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
नेपाल समेत पूरा हिमालयी क्षेत्र भारत की कई महत्वपूर्ण नदियों और नदी घाटियों से जुड़ा हुआ है। हिमालय में किसी ग्लेशियल झील के टूटने पर अचानक आने वाला पानी निचले इलाकों तक पहुंच सकता है।
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भारत के हिमालयी राज्यों में बड़ी संख्या में आबादी नदी घाटियों और पहाड़ी क्षेत्रों में रहती है। ऐसे में ग्लेशियल झीलों के बढ़ते खतरे को लेकर समय रहते निगरानी और चेतावनी व्यवस्था मजबूत करना जरूरी माना जा रहा है।
करीब 200 ग्लेशियल झीलें चिंता का कारण
हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद लगभग 200 ग्लेशियल झीलों को संभावित खतरे के लिहाज से संवेदनशील माना जा रहा है। इनमें पानी का बढ़ता स्तर, ग्लेशियरों का पिघलना और जलवायु परिवर्तन जैसे कारक भविष्य में जोखिम बढ़ा सकते हैं।
अगर किसी संवेदनशील झील की दीवार टूटती है तो अचानक आने वाली बाढ़ से सड़क, पुल, बिजली परियोजनाओं और नदी किनारे बसे इलाकों को नुकसान पहुंच सकता है।
निगरानी और समय पर अलर्ट जरूरी
ऐसी घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए संवेदनशील ग्लेशियल झीलों की लगातार निगरानी, शुरुआती चेतावनी प्रणाली और स्थानीय स्तर पर आपदा प्रबंधन की तैयारी बेहद महत्वपूर्ण है।
नेपाल की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते ग्लेशियल झीलों के खतरे से निपटने के लिए भारत और पड़ोसी देशों को कितनी तेजी से तैयारी करनी होगी।
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Author: Suryodaya Samachar
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