Mirzapur News :- लगातार हो रही बारिश से अहरौरा बांध का जलस्तर कई दिनों तक बढ़ता रहा, लेकिन अब पानी की आवक पर विराम लग गया है। हालांकि जलस्तर स्थिर होने के बावजूद बाढ़ प्रभावित गांवों की परेशानियां अब भी बरकरार हैं।
लकुरा, बीबी पोखर, मदारपुर, बिकसी, मनउर, ढेलवासपुर, नन्दपुर, भोकरौध, ओड़ी और जमालपुर सहित कई गांवों में बाढ़ का असर गहरा है। किसानों की सब्जियां और धान की फसलें पानी में डूबकर बर्बाद हो चुकी हैं, जिससे उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
फसलें चौपट, मुआवजा अधर में
अहरौरा बांध से कई बार पानी छोड़े जाने से सैकड़ों एकड़ की फसल डूब गई। चेतावनी बिंदु 360 फीट तक पहुंचने से पहले फाटक खोलकर पानी छोड़ा गया, जिससे आसपास के गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। अब पानी स्थिर है, लेकिन गांवों की गलियां कीचड़युक्त और गंदगी से भरी हैं। सड़ान्ध से बीमारी फैलने की आशंका बनी हुई है। पशुओं के लिए चारे की भारी किल्लत हो गई है, वहीं कच्चे मकानों में रहने वाले गरीब परिवार बेघर होने की समस्या से जूझ रहे हैं।
धान, मक्का, मूंगफली, तिल्ली, उतैला, मिर्च, पपीता, मूंग, कोहड़ा, टमाटर, लौकी, परवल, करैला और बैगन जैसी फसलें पूरी तरह से नष्ट हो चुकी हैं। किसानों का कहना है कि शासन-प्रशासन की ओर से मुआवजा देने का आश्वासन तो मिला था, लेकिन अब तक किसी को राहत नहीं मिली है।
बीमारियों का खतरा और टूटी सड़कें
गांवों में जलभराव और निकासी न होने से बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। कई जगहों पर टूटी हुई सड़कें आवागमन में बाधा उत्पन्न कर रही हैं। प्रभावित किसान और ग्रामीण शासन-प्रशासन से राहत और क्षतिपूर्ति की मांग कर रहे हैं।
समाजसेवियों ने उठाई आवाज
समाजसेवी प्रमोद केशरी और वरिष्ठ पत्रकार आत्मा प्रसाद त्रिपाठी ने बाढ़ प्रभावित किसानों की समस्याओं पर चिंता जताते हुए जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि सरकार किसानों की बर्बाद फसलों का तत्काल सर्वे कराकर उचित मुआवजा उपलब्ध कराए।
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Author: Suryodaya Samachar
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