India Pakistan war:- कई हफ्तों की तनावपूर्ण घटनाओं के बाद, भारत ने अब स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल अपनी शर्तों पर ही किसी भी समझौते के लिए तैयार होगा।
जानकारी देने वाले अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया था कि युद्धविराम केवल “हमारी निर्धारित शर्तों” पर ही स्वीकार्य होगा।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, भारत ने पाकिस्तान के साथ संघर्ष विराम पर सहमति अपनी प्राथमिकताओं और शर्तों के अनुरूप दी है। यह सहमति 10 मई को दोनों देशों द्वारा संयुक्त घोषणा के बाद सामने आई है।
बताया जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के पश्चात पाकिस्तान की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और आईएसआई के वायु प्रमुख असीम मलिक ने भारत के एनएसए अजीत डोभाल से वार्ता आरंभ करने के प्रयास किए। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डोभाल और एस. जयशंकर को साफ संकेत दिया कि किसी भी प्रकार का समझौता केवल भारत की रणनीतिक शर्तों के तहत ही किया जाएगा।
बड़ी बात: भारत-पाक के बीच युद्धविराम लागू
इंडिया टुडे से बातचीत में अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय की स्पष्ट नीति के चलते ही भारत ने अपनी शर्तों पर पाकिस्तान को युद्धविराम के लिए तैयार किया। इस प्रक्रिया में भारतीय पक्ष ने किसी तीसरे देश या संस्था की मध्यस्थता को पूरी तरह नकार दिया।
सेना से लेकर कूटनीति तक सब कुछ भारत के नियंत्रण में रहा
विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तानी सेना के डीजीएमओ ने शुक्रवार को दोपहर 3:35 बजे भारतीय समकक्ष को फोन कर संपर्क साधा। दोनों पक्षों में तय हुआ कि शाम 5:00 बजे से जमीनी, वायु और समुद्री सीमाओं पर सभी प्रकार की सैन्य कार्रवाई स्थगित कर दी जाएगी।
इसके तहत युद्धविराम लागू करने के आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। दोनों देशों के सैन्य संचालन प्रमुख 12 मई को दोपहर 12:00 बजे दोबारा संपर्क कर स्थिति का मूल्यांकन करेंगे।
राजनयिक स्तर पर चला गहन संवाद
इस घोषणा से पहले, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्री जयशंकर अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में थे। पूरे परिदृश्य पर प्रधानमंत्री मोदी को लगातार जानकारी दी जाती रही।
युद्धविराम का स्वरूप पूर्णतः द्विपक्षीय
सूत्रों ने स्पष्ट किया कि यह युद्धविराम पूरी तरह भारत और पाकिस्तान के आपसी संवाद के ज़रिए ही संभव हो पाया। पाकिस्तान की ओर से पहल करते हुए ही इस दिशा में आगे बढ़ा गया, और भारत ने अपनी शर्तों के अनुरूप रुख स्पष्ट रखा।
Author: Suryodaya Samachar
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