बड़ी खबर
Kisan Panchayat 2026 :- भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति की दो दिवसीय राष्ट्रीय किसान पंचायत 12-13 सितंबर को Saharsa Land Dispute :- सहरसा में पुश्तैनी जमीन पर कब्जे का आरोप, वृद्ध महिला ने डीआईजी से लगाई न्याय की गुहार Aharora Thakur Ji Mela :- अहरौरा ठाकुर जी मेले में श्रृंगार को लेकर विवाद, बैठक के बाद सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझा मामला Mirzapur Accident:- खदानों में सुरक्षा इंतजाम ही मजदूरों की जान का कवच, मुआवजे से वापस नहीं आती जिंदगी Kainchi Dham Tourist Places :- कैंची धाम जा रहे हैं तो इन खूबसूरत जगहों को भी करें एक्सप्लोर, झीलों और पहाड़ों के बीच यादगार बनेगा सफर Deepika Padukone Maternity Photos: बेटी दुआ के बर्थडे पर दीपिका ने फ्लॉन्ट किया बेबी बंप, ₹49 हजार के लुक ने खींचा ध्यान

Home » राष्ट्रीय » Madras High Court : चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर मद्रास हाई कोर्ट ने सुनाया अपना फैसला…………..

Madras High Court : चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर मद्रास हाई कोर्ट ने सुनाया अपना फैसला…………..

Madras High Court : मद्रास हाईकोर्ट 11 जनवरी को एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि केवल बाल पोर्नोग्राफी देखना यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम और सूचना और प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत अपराध नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने जिस 28 वर्षीय व्यक्ति पर बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री डाउनलोड करने और देखने का आरोप लगाया गया था उसे भी रद्द कर दिया।

इस केस की सुनवाई न्यायमूर्ति आनंद वेंकटेश कर रहे थे। उन्होनें सुनवाई के दौरान कहा कि ‘पॉक्सो अधिनियम के तहत आरोप लगाने के लिए “किसी बच्चे या बच्चों का इस्तेमाल अश्लील साहित्य के लिए किया गया’ होना जरुरी है।”

Jhansi News : पति की थम चुकी थी सांस… पत्नी ने समझा नींद , ट्रेन में 12 घंटे तक सफर करती रही लाश – Suryodaya Samachar

पॉक्सो अधिनियम की धारा 14(1)

अदालत ने अपने 11 जनवरी के आदेश में कहा कि “पॉक्सो अधिनियम की धारा 14(1) के तहत अपराध बनाने के लिए, किसी बच्चे या बच्चों का इस्तेमाल अश्लील साहित्य के लिए किया गया होगा। यहां तक कि यह मानते हुए भी कि आरोपी व्यक्ति ने बाल पोर्नोग्राफी वीडियो देखा था, यह सख्ती से यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा अधिनियम, 2012 की धारा 14 (1) के दायरे में नहीं आएगा।”

2020 का केस

जनवरी 2020 में, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध) द्वारा प्राप्त एक पत्र के आधार पर याचिकाकर्ता एस हरीश पर दो अधिनियमों के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच के तहत उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया। फोरेंसिक विज्ञान विभाग ने दो फाइलों की पहचान करते हुए पुलिस को एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें बाल पोर्नोग्राफ़ी सामग्री शामिल थी। अपनी याचिका में, 28 वर्षीय व्यक्ति ने कहा कि वह नियमित रूप से पोर्नोग्राफी देखता है, लेकिन उसने बाल पोर्नोग्राफिक सामग्री नहीं देखी।

ट्विटर पर भी जुड़े रहिए हमारे साथ :- Twitter 

Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

खबर से पहले आप तक

Leave a Comment

Live Cricket

ट्रेंडिंग