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केंद्रीय अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना: अघोषित बंदी से लाखों छात्रों के सपनों पर संकट

केंद्रीय अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना :- भारत में शिक्षा को हर वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना अब अघोषित रूप से ठप हो चुकी है। यह योजना वर्षों से आर्थिक रूप से कमजोर अल्पसंख्यक छात्रों के लिए शिक्षा का एक महत्वपूर्ण स्रोत रही है, लेकिन बीते दो वर्षों से इसमें आवेदन ही नहीं लिए जा रहे हैं। इसके अलावा, 2024-25 के बजट में इस योजना के लिए मात्र 635 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो कि देशभर के पिछले बकाया राशि को चुकाने में ही खत्म हो जाएगा। इससे नए छात्रों को कोई लाभ नहीं मिलेगा, और इस योजना के भविष्य पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।

छात्रवृत्ति योजना का महत्व और पिछला बजट

केंद्रीय अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना का उद्देश्य मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समुदायों के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करना था। इस योजना के तहत तीन श्रेणियों में छात्रवृत्ति दी जाती थी—

  • 1. प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति (कक्षा 1 से 10 तक के छात्रों के लिए)
  • 2. पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति (कक्षा 11 से उच्च शिक्षा तक के लिए)
  • 3. मेरिट-कम-मीन्स छात्रवृत्ति (पेशेवर और तकनीकी शिक्षा के लिए)

वर्ष 2021-22 में अकेले उत्तर प्रदेश को ही 442 करोड़ रुपये मिले थे, जिससे लाखों छात्रों को लाभ पहुंचा था। लेकिन पिछले दो वर्षों से नए आवेदनों को रोक दिया गया, जिससे गरीब तबके के कई छात्र उच्च शिक्षा से वंचित हो गए। अब 2024-25 के बजट में पूरे देश के लिए मात्र 635 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो यह दर्शाता है कि सरकार का इस योजना को लेकर रुझान कम हो चुका है।

छात्रों पर प्रभाव और उनकी चिंता

अल्पसंख्यक छात्रों के लिए यह योजना शिक्षा के प्रति प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत थी। खासतौर पर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्र इसी छात्रवृत्ति की सहायता से अपनी पढ़ाई पूरी कर पाते थे। लेकिन दो वर्षों से नए आवेदनों की रोक और अब नाममात्र का बजट दिए जाने से लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।

अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों और अभिभावकों में इस मुद्दे को लेकर चिंता बढ़ रही है। कई छात्र, जिन्होंने छात्रवृत्ति के सहारे उच्च शिक्षा के सपने देखे थे, अब वित्तीय संकट की वजह से पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं। खासकर मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य पेशेवर पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले छात्रों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार का रुख और संभावित समाधान

सरकार की ओर से इस योजना के बंद होने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन बजट में मिली राशि और नए आवेदनों पर रोक से स्पष्ट संकेत मिलता है कि यह योजना लगभग समाप्ति की ओर है। अल्पसंख्यक कल्याण से जुड़ी संस्थाओं और विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को संसद में उठाने की मांग की है।

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अगर यह योजना पूरी तरह से बंद हो गई, तो इससे लाखों छात्रों को निजी संस्थानों की महंगी फीस भरने में कठिनाई होगी और वे उच्च शिक्षा से वंचित रह सकते हैं। सरकार को चाहिए कि वह इस योजना को पुनः शुरू करे और बजट में इसे समुचित धनराशि आवंटित करे ताकि अधिक से अधिक छात्रों को इसका लाभ मिल सके।

केंद्रीय अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना का ठप हो जाना सामाजिक और शैक्षिक समानता के लक्ष्य को कमजोर करता है। यह न केवल अल्पसंख्यक छात्रों के भविष्य पर असर डालेगा, बल्कि समाज में शिक्षा का स्तर भी प्रभावित होगा। सरकार को इस योजना की समीक्षा करनी चाहिए और इसे दोबारा प्रभावी रूप से लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए, ताकि देश के सभी वर्गों को शिक्षा का समान अवसर मिल सके।

Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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