Unnao news :- उत्तर प्रदेश के जनपद उन्नाव की ग्राम सुमरहा में घरौनी सर्वे के दौरान हुए भ्रष्टाचार और अनियमितताओं ने ग्रामीणों को गहरी निराशा में डाल दिया है। ग्रामवासी लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कई स्तरों पर शिकायतें कीं परंतु आज तक उन्हें कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली। यह मामला अब मंडला आयुक्त और उच्च अधिकारियों के समक्ष न्याय की पुकार के रूप में पहुंचा है।
ग्राम पंचायत सुमरहा के निवासी और उनकी स्थिति
ग्राम पंचायत सुमरहा परगना हडहा तहसील और जिला उन्नाव में स्थित है। यहां के अधिकांश निवासी पीढ़ियों से अपने घरों में रह रहे हैं। यह परिवार सौ से डेढ़ सौ वर्षों से इस भूमि पर काबिज और कामिल हैं। ग्रामीणों का जीवन कृषि पर आधारित है तथा वे ईमानदारी से अपने घरों और खेतों की देखभाल करते आ रहे हैं। परंतु जब घरौनी सर्वे की प्रक्रिया शुरू हुई तो इन पुराने और वैध निवासियों को उनके अधिकारों से वंचित कर दिया गया।
लेखपाल और सहयोगियों पर गंभीर आरोप
ग्रामीणों ने अपने शपथ पत्र में बताया कि घरौनी सर्वे का कार्य लेखपाल जितेंद्र कुशवाहा द्वारा किया गया था। सर्वे के नाम पर प्रत्येक ग्रामीण से पांच हजार रुपये की अवैध वसूली की गई। लेखपाल का सहयोग अर्जुन बाजपेयी नामक व्यक्ति कर रहा था जो सीधे ग्रामवासियों से धन एकत्रित करता था। यह रकम घरौनी देने के नाम पर ली गई थी लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत रही। जिन लोगों ने पैसे दिए वे भी ठगे गए और जिनका वैध घर आबादी क्षेत्र में है उन्हें घरौनी नहीं दी गई।
प्रभावशाली लोगों को मिला अनुचित लाभ
शपथीगणों का कहना है कि सर्वे पूर्ण होने के बाद घरौनी वितरण में भारी पक्षपात किया गया। ग्राम के कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों को प्राथमिकता दी गई। लेखपाल के सहयोगी और अविवाहित व्यक्तियों को भी घरौनी दी गई। यहां तक कि जिन लोगों के मकान पशुचर भूमि घूर के गड्ढों या खलिहान की जगह पर बने हैं या जिनके मकान अस्तित्व में भी नहीं हैं उन्हें भी घरौनी जारी कर दी गई। यह कार्यवाही पूरी तरह नियमों के विपरीत रही।
वास्तविक हकदारों की अनदेखी
ग्राम के वे निवासी जिनके घर आबादी क्षेत्र में पुराने समय से बने हैं उन्हें सर्वे में शामिल नहीं किया गया। जब उन्होंने वर्तमान लेखपाल से अभिलेखों का निरीक्षण कराया तो पाया गया कि उनका नाम सर्वे रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं है। इस अन्याय से ग्रामीणों में गहरा असंतोष फैल गया। उन्होंने कई बार प्रशासन को इसकी सूचना दी परंतु हर बार उन्हें केवल आश्वासन मिला।
ग्रामीणों के सतत प्रयास और शासन से गुहार
शपथीगणों ने अपनी शिकायत को हर संभव माध्यम से प्रस्तुत किया। दिनांक 20 जनवरी 2025 को सम्पूर्ण समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र दिया गया। इसके बाद 24 मार्च 2025 को माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ को आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज की गई। 28 मार्च 2025 को ग्रामीणों ने थाना बीघापुर जाकर थानाध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से आवेदन सौंपा। 29 मार्च 2025 को जिलाधिकारी उन्नाव को भी आवेदन प्रस्तुत किया गया।
इसके बाद न्यायिक उपजिलाधिकारी आनन्द नायक ने 5 अप्रैल 2025 को मौके पर जाकर मुआयना किया। इसके बावजूद किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई। निराश ग्रामीणों ने पुनः 23 अप्रैल 2025 को जिलाधिकारी उन्नाव को व्यक्तिगत रूप से आवेदन दिया। 26 मई और 21 जून 2025 को भी शिकायतें दोहराई गईं। अंततः 7 अगस्त 2025 को शपथीगण मुख्यमंत्री जनदरबार में उपस्थित होकर व्यक्तिगत रूप से न्याय की गुहार लगाने पहुंचे।
कार्यवाही का अभाव और बढ़ती निराशा
लगातार शिकायतों और प्रमाणों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। न तो भ्रष्ट लेखपाल के विरुद्ध कार्रवाई हुई और न ही घरौनी वितरण की पुनः जांच कराई गई। इससे ग्रामीणों में गहरा असंतोष व्याप्त है। उनका कहना है कि जब तक उच्च अधिकारियों की देखरेख में नया सर्वे नहीं कराया जाएगा तब तक न्याय की उम्मीद अधूरी रहेगी।
न्याय की मांग और अपेक्षित समाधान
ग्रामीणों ने अब मंडला आयुक्त महोदय के समक्ष यह शपथ पत्र प्रस्तुत कर अपनी बात रखी है। उन्होंने मांग की है कि पुराना घरौनी सर्वे पूर्णतः निरस्त किया जाए और उच्च अधिकारियों की उपस्थिति में पुनः सर्वे कराया जाए ताकि असली हकदारों को उनका अधिकार मिल सके। साथ ही दोषी कर्मचारियों और सहयोगियों के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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ग्राम पंचायत सुमरहा की यह घटना केवल एक गांव की समस्या नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में प्रशासनिक पारदर्शिता की आवश्यकता को उजागर करती है। जब जनता को न्याय पाने के लिए महीनों तक दर-दर भटकना पड़े तो यह व्यवस्था की कमजोरी का प्रतीक है। सुमरहा के ग्रामीण आज भी न्याय की उम्मीद में खड़े हैं और उन्हें विश्वास है कि सत्य और न्याय की जीत अवश्य होगी।
Author: Suryodaya Samachar
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