Swami Chaitanyananda :- दिल्ली के आलीशान वसंत कुंज इलाके में चल रहे एक मशहूर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट और आश्रम की चमक-धमक के पीछे छिपा एक खौफनाक राज़ सामने आया है। श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट (SRISIIM) के पूर्व डायरेक्टर और स्वयंभू संत स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती उर्फ पार्थ सारथी पर 17 छात्राओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। इनमें यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ और मानसिक प्रताड़ना जैसी घटनाएँ शामिल हैं।
फिलहाल यह कथित ‘धर्मगुरु’ फरार है और दिल्ली पुलिस उसकी तलाश कर रही है। उसकी आखिरी लोकेशन उत्तर प्रदेश के आगरा में ट्रेस हुई बताई जा रही है। लेकिन केस सिर्फ शारीरिक शोषण तक सीमित नहीं है—इसमें फर्जी राजनयिक नंबर प्लेट का इस्तेमाल, डिजिटल सबूतों से छेड़छाड़ और संस्थान के कुछ कर्मचारियों की संलिप्तता का भी खुलासा हुआ है।
आइए जानते हैं कौन है यह तथाकथित संत? और आखिर कितनी संपत्ति का मालिक है यह आरोपी?
Who Is Swami Chaitanyananda Saraswati: संत की आड़ में दरिंदा, कौन है चैतन्यानंद?
स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती, जिसे पहले पार्थ सारथी के नाम से जाना जाता था, मूल रूप से ओडिशा का निवासी है। बीते करीब 12 वर्षों से वह वसंत कुंज (Vasant Kunj Ashram) में श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट का संचालन करता रहा। यह संस्थान कर्नाटक के श्रृंगेरी स्थित दक्षिणाम्नाय श्री शारदा पीठ से जुड़ा हुआ है। लंबे समय से प्रभावशाली भूमिका निभाने वाला यह शख्स अब अपने गुनाहों की वजह से चर्चा में है।
Who Is Sringeri Mutt Administrator PA Murali: किसने खोला चैतन्यानंद का राज़?
4 अगस्त 2025 को श्री शृंगेरी मठ के प्रशासक पीए मुरली ने वसंत कुंज नॉर्थ थाने में शिकायत दर्ज कराई। आरोप लगाया गया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए PGDM कोर्स कर रही छात्राओं को स्कॉलरशिप देने के बहाने स्वामी ने उनका यौन शोषण किया।
17 Girls Abuse Case: 17 छात्राओं का दर्दनाक खुलासा
पुलिस ने 32 छात्राओं के बयान दर्ज किए, जिनमें से 17 ने साफ-साफ बताया कि स्वामी ने उन्हें अश्लील व्हाट्सएप और SMS मैसेज भेजे, अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और जबरन शारीरिक संपर्क की कोशिश की। कुछ छात्राओं ने यह भी खुलासा किया कि संस्थान की कुछ महिला फैकल्टी और प्रशासनिक कर्मचारी स्वामी की गलत मांगों को मानने के लिए उन पर दबाव डालती थीं।
Swami Chaitanyananda Saraswati Income: स्वामी की कमाई का रहस्य
स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती, जो पहले पार्थ सारथी के नाम से जाने जाते थे, पिछले 12 सालों से दिल्ली के वसंत कुंज में श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट के निदेशक और आश्रम के कार्यवाहक रहे हैं। इस दौरान उनकी आय के स्रोतों पर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, चैतन्यानंद ने आश्रम और संस्थान के प्रभावशाली पद का इस्तेमाल कर न केवल आर्थिक लाभ कमाया, बल्कि अपनी छवि को एक धर्मगुरु के रूप में स्थापित किया। हालांकि, उनकी सटीक आय के आंकड़े सार्वजनिक नहीं हैं, लेकिन उनकी लक्जरी वॉल्वो कार और फर्जी राजनयिक नंबर प्लेट (39 UN 1) का उपयोग इस बात का संकेत देता है कि उनकी कमाई सामान्य नहीं थी। पुलिस ने इस कार को इंस्टीट्यूट के बेसमेंट से जब्त कर लिया है और इसके लिए 25 अगस्त 2025 को एक अलग FIR दर्ज की गई है।
Swami Chaitanyananda Saraswati Criminal History: अश्लील मैसेज से लेकर फर्जी नंबर प्लेट तक
पुलिस ने संस्थान से CCTV फुटेज, NVR और हार्ड डिस्क बरामद की हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। 16 पीड़ित छात्राओं के बयान पटियाला हाउस कोर्ट में धारा 183 BNSS के तहत मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किए गए हैं। ये डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्य इस केस में अहम सबूत बन सकते हैं।
Chaitanyananda Saraswati Criminal Record- पुराना पापी है स्वामी!
चैतन्यानंद का आपराधिक इतिहास भी चौंकाने वाला है। 2009 में दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी में उनके खिलाफ धोखाधड़ी और छेड़छाड़ का मामला दर्ज हुआ था। 2016 में वसंत कुंज में एक महिला ने उनके खिलाफ छेड़छाड़ की शिकायत की थी। पुलिस अब इन पुराने मामलों की भी जांच कर रही है ताकि स्वामी के अपराधों की पूरी कुंडली तैयार की जा सके।
संस्थान और शृंगेरी पीठ का रुख
मामला सामने आने के बाद श्री शृंगेरी मठ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 9 अगस्त 2025 को स्वामी चैतन्यानंद को सभी पदों से हटा दिया और उससे सारे संबंध तोड़ लिए। पीठ ने बयान जारी कर कहा कि स्वामी का आचरण अवैध, अनुचित और संस्थान के हितों के खिलाफ था। श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट, जो AICTE से मान्यता प्राप्त है, का संचालन एक गवर्निंग काउंसिल करती है, जिसकी अध्यक्षता प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. कृष्णा वेंकटेश कर रहे हैं। काउंसिल ने छात्राओं की पढ़ाई और सुरक्षा को सुनिश्चित करने का वादा किया है।
स्वामी अदृश्य? आसमान खा गई या जमीन निगल गई? तलाश में पुलिस
दिल्ली पुलिस ने स्वामी के ठिकानों पर कई छापेमारी की, लेकिन वह अब तक फरार है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उसकी आखिरी लोकेशन आगरा के पास मिली थी। पुलिस ने हवाई अड्डों पर भी निगरानी बढ़ा दी है ताकि वह देश छोड़कर न भाग सके। दक्षिण-पश्चिमी जिला पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने कहा, ‘छात्राओं की शिकायत बेहद गंभीर है। हम सभी एंगल से जांच कर रहे हैं और आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।’
डिजिटल युग में क्राइम की नई परिभाषा
यह मामला न केवल यौन शोषण का है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे डिजिटल युग में अपराधी तकनीक का दुरुपयोग करते हैं। अश्लील मैसेज, फर्जी नंबर प्लेट और संभावित CCTV फुटेज के दुरुपयोग ने इस केस को एक डिजिटल क्राइम की शक्ल दी है। पुलिस की फॉरेंसिक जांच और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण इस मामले में निर्णायक साबित हो सकता है।
इंसाफ की राह पर
स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती का यह कांड शिक्षा और आध्यात्मिकता के मंदिरों में छिपे अपराधों की काली सच्चाई को उजागर करता है। 17 छात्राओं की हिम्मत और पुलिस की तेज जांच से उम्मीद है कि इस ‘संत’ की असलियत जल्द सामने आएगी। लेकिन सवाल यह है-क्या यह आखिरी मामला होगा, या ऐसे और कितने स्वामी सिस्टम की आड़ में अपने काले कारनामों को अंजाम दे रहे हैं? कमेंट बॉक्स में अपनी राय दीजिए…
Author: Suryodaya Samachar
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