Supreme Court on Gender Discrimination: सुप्रीम कोर्ट ने 1988 के एक पुराने नौकरी विवाद में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन को हरियाणा की महिला सुमित्रा को 12 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। महिला को एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में नौकरी नहीं मिली थी।
करीब तीन दशक पुराने नौकरी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) को हरियाणा की एक महिला को 12 लाख रुपये का एकमुश्त मुआवजा देने का निर्देश दिया है। महिला को 1988 में एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में नौकरी के लिए योग्य होने के बावजूद नियुक्त नहीं किया गया था। मामले में महिला के खिलाफ उसके जेंडर को आधार बनाए जाने की बात सामने आई, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई।
1988 में एलपीजी प्लांट में नौकरी के लिए किया था आवेदन Supreme Court on Gender Discrimination
यह मामला हरियाणा की रहने वाली सुमित्रा से जुड़ा है। वर्ष 1988 में करनाल में एलपीजी बॉटलिंग प्लांट के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। सुमित्रा उन 49 उम्मीदवारों में शामिल थीं, जिनकी स्थानीय समिति ने नौकरी के लिए सिफारिश की थी।
उन्होंने कैजुअल खलासी/प्यून या रिफिलिंग हेल्पर जैसे पद के लिए प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, 49 उम्मीदवारों में से 43 लोगों को नियुक्ति पत्र मिल गए, लेकिन सुमित्रा को नौकरी नहीं दी गई।
सिलेंडर उठाने और नाइट शिफ्ट का दिया गया तर्क Supreme Court on Gender Discrimination
मामले की सुनवाई के दौरान इंडियन ऑयल की ओर से दलील दी गई कि रिफिलिंग हेल्पर के काम में एलपीजी सिलेंडर उठाना और रात की शिफ्ट में काम करना शामिल था। कंपनी की ओर से यह भी कहा गया कि काम की प्रकृति और कार्यस्थल के माहौल को देखते हुए अधिकारी महिला उम्मीदवार को इस पद के लिए उपयुक्त नहीं मान सकते थे।
सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल महिला होने के आधार पर किसी योग्य उम्मीदवार को अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने इस रवैये को महिलाओं के सम्मान और समान अवसर के सिद्धांत के विपरीत माना।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? Supreme Court on Gender Discrimination
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को सिर्फ उनके जेंडर के आधार पर किसी काम के लिए अयोग्य मानना उचित नहीं है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि घरों में महिलाएं खुद एलपीजी सिलेंडर उठाने और बदलने का काम करती हैं, ऐसे में केवल महिला होने के आधार पर नौकरी से इनकार करने का तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता।
महिला अब रिटायरमेंट की उम्र पार कर चुकी हैं Supreme Court on Gender Discrimination
सुमित्रा की कानूनी लड़ाई कई वर्षों तक चली। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अब उनकी उम्र 63 वर्ष हो चुकी है और वह सेवानिवृत्ति की उम्र से आगे हैं। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने इस चरण पर उन्हें नौकरी देने के बजाय 12 लाख रुपये का एकमुश्त मुआवजा देना उचित माना।
अदालत ने मामले में लंबी कानूनी लड़ाई और महिला को हुए नुकसान को ध्यान में रखते हुए मुआवजे का आदेश दिया।
ट्रायल कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक चला मामला Supreme Court on Gender Discrimination
रिपोर्ट के मुताबिक, सुमित्रा ने शुरुआती स्तर पर अदालत का रुख किया था। वर्ष 1990 में ट्रायल कोर्ट ने IOCL को उन्हें मजदूर के अलावा किसी पद पर समायोजित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद कंपनी ने फैसले को चुनौती दी।
बाद की कानूनी प्रक्रिया में मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा। हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2025 में पहले के आदेश को पलट दिया। इसके बाद सुमित्रा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
12 लाख रुपये क्यों मिला मुआवजा? Supreme Court on Gender Discrimination
सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य परिस्थितियों में महिला की लंबी कानूनी लड़ाई और उनकी वर्तमान उम्र महत्वपूर्ण रही। चूंकि अब उनके लिए नियमित नौकरी का अवसर व्यावहारिक रूप से समाप्त हो चुका है, इसलिए अदालत ने नियुक्ति के स्थान पर ₹12 लाख का एकमुश्त मुआवजा देने का आदेश दिया।
यह मामला रोजगार में जेंडर के आधार पर भेदभाव और समान अवसर के सवाल को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बना है।
कंपनी ने मध्यस्थता की बात भी रखी थी Supreme Court on Gender Discrimination
सुनवाई के दौरान इंडियन ऑयल की ओर से मामले को मध्यस्थता के लिए भेजने का सुझाव दिया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इतने लंबे समय से चले आ रहे विवाद को और लंबित रखने के बजाय मामले में आदेश पारित करना उचित समझा।
China Drone Submarine Mothership :- चीन बना रहा अनोखा ‘मदरशिप’, समुद्र में उतारेगा विशाल बिना चालक वाली ड्रोन सबमरीन; जानिए क्या है खास
एक नजर में
- मामला: एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में नौकरी से जुड़ा विवाद
- महिला: सुमित्रा, हरियाणा
- भर्ती वर्ष: 1988
- पद: रिफिलिंग हेल्पर/कैजुअल खलासी से संबंधित पद
- शॉर्टलिस्ट उम्मीदवार: 49
- नियुक्त किए गए उम्मीदवार: 43
- सुप्रीम कोर्ट का आदेश: ₹12 लाख मुआवजा
- कंपनी: इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड
- पीठ: जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली
Author: Suryodaya Samachar
खबर से पहले आप तक






