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Radha Ashtami 2026 :- राधाष्टमी व्रत के बिना अधूरा माना जाता है जन्माष्टमी का फल? जानिए 15 दिन बाद क्यों रखा जाता है यह उपवास China Drone Submarine Mothership :- चीन बना रहा अनोखा ‘मदरशिप’, समुद्र में उतारेगा विशाल बिना चालक वाली ड्रोन सबमरीन; जानिए क्या है खास Aligarh Sai Global University : 9.53 हेक्टेयर में बनेगी साईं ग्लोबल यूनिवर्सिटी, यूपी कैबिनेट ने दी मंजूरी Waiting Hai Web Series : रेलवे टिकट की वेटिंग से शुरू हुई कहानी, खुलता है बड़े टिकट स्कैम का राज, जानिए पूरी डिटेल Chitrakoot Link Expressway: चित्रकूट को मिलेगा नया एक्सप्रेसवे कनेक्शन, ₹1008 करोड़ की परियोजना को कैबिनेट की मंजूरी Vishwakarma Puja 2026: सोने की लंका से द्वारका तक, भगवान विश्वकर्मा से जुड़ी हैं इन 5 पौराणिक नगरों की कहानियां

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Radha Ashtami 2026 :- राधाष्टमी व्रत के बिना अधूरा माना जाता है जन्माष्टमी का फल? जानिए 15 दिन बाद क्यों रखा जाता है यह उपवास

Radha Ashtami 2026

Radha Ashtami 2026: भगवान श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी के बाद ब्रज में एक और बड़ा धार्मिक पर्व मनाया जाता है—राधाष्टमी। धार्मिक मान्यताओं में राधा रानी को श्रीकृष्ण की परम प्रिय और प्रेम-भक्ति का स्वरूप माना गया है। इसी वजह से कई वैष्णव परंपराओं में कृष्ण जन्माष्टमी के साथ राधाष्टमी को भी विशेष महत्व दिया जाता है। हालांकि, यह मान्यता है कि राधाष्टमी का व्रत जन्माष्टमी के व्रत के लिए अनिवार्य है, ऐसा सभी परंपराओं में समान रूप से नहीं माना जाता। 

जन्माष्टमी के 15 दिन बाद आती है राधाष्टमी Radha Ashtami 2026

हिंदू पंचांग के अनुसार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इसके करीब 15 दिन बाद भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी आती है, जिसे राधाष्टमी के नाम से जाना जाता है।

यही वजह है कि जन्माष्टमी और राधाष्टमी के बीच लगभग 15 दिनों का अंतर रहता है। वर्ष 2026 में जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई गई, जबकि राधाष्टमी 19 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी।

राधाष्टमी पर क्यों रखा जाता है व्रत? Radha Krishna 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राधाष्टमी राधा रानी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। इस दिन भक्त राधा-कृष्ण की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और भजन-कीर्तन के माध्यम से आराधना करते हैं।

Radha Ashtami 2026

ब्रज क्षेत्र में इस पर्व का विशेष महत्व है। बरसाना, वृंदावन, मथुरा और नंदगांव में राधाष्टमी के अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं।

राधा रानी और श्रीकृष्ण का क्या संबंध है? Radha Ashtami 2026 

भक्ति परंपरा में राधा और कृष्ण को प्रेम और भक्ति के अभिन्न प्रतीक के रूप में देखा जाता है। धार्मिक कथाओं में राधा रानी का जन्म बरसाना में वृषभानु और कीर्ति देवी के घर बताया गया है।

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वैष्णव परंपराओं में राधा नाम को श्रीकृष्ण की भक्ति से गहराई से जोड़ा गया है। इसी कारण मंदिरों और धार्मिक अनुष्ठानों में अक्सर “राधा-कृष्ण” का एक साथ स्मरण किया जाता है।

कृष्ण पूजा में राधाष्टमी का महत्व Radha Ashtami 2026 

भक्त परंपरा में यह विश्वास प्रचलित है कि राधा रानी की कृपा के बिना श्रीकृष्ण की भक्ति पूर्ण नहीं मानी जाती। राधा को कृष्ण की प्रेम-शक्ति और भक्ति का स्वरूप माना जाता है।

इसी धार्मिक भावना के कारण कुछ भक्त जन्माष्टमी के बाद राधाष्टमी का व्रत भी रखते हैं। इसे कृष्ण जन्मोत्सव के बाद राधा रानी के प्रति श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने का अवसर माना जाता है।

2026 में कब है राधाष्टमी?

पंचांग के अनुसार राधाष्टमी 19 सितंबर 2026, शनिवार को मनाई जाएगी। उपलब्ध पंचांग जानकारी के मुताबिक अष्टमी तिथि 18 सितंबर दोपहर से शुरू होकर 19 सितंबर दोपहर तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर पर्व 19 सितंबर को मनाया जाएगा।

राधाष्टमी 2026 एक नजर में

  • पर्व: राधाष्टमी
  • तिथि: 19 सितंबर 2026, शनिवार
  • पक्ष: भाद्रपद शुक्ल पक्ष
  • तिथि: अष्टमी
  • संबंध: राधा रानी के प्राकट्य दिवस की धार्मिक मान्यता
  • विशेष महत्व: राधा-कृष्ण की संयुक्त भक्ति
  • प्रमुख क्षेत्र: बरसाना, वृंदावन, मथुरा और नंदगांव

क्या राधाष्टमी व्रत करना जरूरी है? Radha Ashtami 2026

यह बात ध्यान रखना जरूरी है कि राधाष्टमी व्रत को जन्माष्टमी व्रत की अनिवार्य शर्त बताना एक धार्मिक मान्यता है, सार्वभौमिक नियम नहीं। अलग-अलग वैष्णव और क्षेत्रीय परंपराओं में व्रत एवं पूजा की विधियां अलग हो सकती हैं। इसलिए श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा, संप्रदाय और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा-व्रत कर सकते हैं।

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धार्मिक जानकारी: यह लेख प्रचलित हिंदू धार्मिक मान्यताओं और पंचांग संबंधी जानकारी पर आधारित है।

Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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