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Vishwakarma Puja 2026: सोने की लंका से द्वारका तक, भगवान विश्वकर्मा से जुड़ी हैं इन 5 पौराणिक नगरों की कहानियां

Vishwakarma Puja 2026: हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का दिव्य वास्तुकार और शिल्पकार माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उन्होंने देवताओं के लिए भव्य महलों, नगरों और अद्भुत अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया था। यही वजह है कि विश्वकर्मा पूजा के दिन इंजीनियर, कारीगर, शिल्पकार, मैकेनिक, वास्तुकार और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े लोग विशेष रूप से उनकी पूजा करते हैं। वर्ष 2026 में विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर को मनाई जाएगी।

विश्वकर्मा पूजा सिर्फ औजारों और मशीनों की पूजा तक सीमित नहीं है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा की उस दिव्य रचनात्मक शक्ति को भी याद किया जाता है, जिसे भारतीय परंपरा में निर्माण और तकनीकी कौशल का प्रतीक माना गया है। पौराणिक कथाओं में उनके द्वारा बनाए गए कई नगरों का उल्लेख मिलता है। इनमें लंका, द्वारका, इंद्रप्रस्थ और हस्तिनापुर जैसी प्रसिद्ध जगहें शामिल हैं।

1. सोने की लंका
Vishwakarma Puja 2026

रामायण की कथा में लंका का विशेष महत्व है। लोकप्रिय पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान विश्वकर्मा ने लंका का निर्माण किया था। इसे सोने से बनी बेहद भव्य नगरी के रूप में वर्णित किया जाता है।

कथा के अनुसार बाद में यह नगरी रावण के अधिकार में आ गई। इसी लंका में माता सीता को अशोक वाटिका में रखा गया था और भगवान श्रीराम की सेना ने समुद्र पार करके यहां पहुंचकर रावण के खिलाफ युद्ध किया था।

लंका की स्वर्णिम भव्यता का वर्णन भारतीय धार्मिक साहित्य में लंबे समय से मिलता रहा है। हालांकि, इसे ऐतिहासिक निर्माण-स्थल के रूप में नहीं बल्कि रामायण से जुड़ी पौराणिक परंपरा के संदर्भ में समझना चाहिए।

2. भगवान श्रीकृष्ण की द्वारका

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भगवान विश्वकर्मा से जुड़ी सबसे चर्चित निर्माण कथाओं में द्वारका नगरी भी शामिल है। महाभारत और कृष्ण परंपरा से जुड़े वर्णनों में द्वारका को भगवान श्रीकृष्ण की नगरी बताया गया है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार श्रीकृष्ण के लिए समुद्र के किनारे एक भव्य नगरी का निर्माण कराया गया था। इसी कारण द्वारका को कृष्ण की राजधानी के रूप में जाना जाता है। धार्मिक परंपरा में इसे अत्यंत समृद्ध और सुव्यवस्थित नगर के रूप में चित्रित किया गया है।

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आज गुजरात का द्वारका देश के प्रमुख धार्मिक तीर्थस्थलों में गिना जाता है और द्वारकाधीश मंदिर के कारण इसकी धार्मिक पहचान बेहद महत्वपूर्ण है।

3. इंद्रप्रस्थ
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महाभारत में इंद्रप्रस्थ का उल्लेख पांडवों की राजधानी के रूप में मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस नगर को बेहद सुंदर और भव्य स्वरूप प्रदान करने में भगवान विश्वकर्मा की भूमिका मानी जाती है।

महाभारत की कथा में इंद्रप्रस्थ के राजमहल की अद्भुत बनावट और उसकी भव्यता का विशेष वर्णन मिलता है। इसी महल से जुड़ी मायावी संरचनाओं का प्रसंग भी महाभारत की चर्चित घटनाओं में शामिल है।

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4. हस्तिनापुर
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महाभारत की कथा में हस्तिनापुर का स्थान बेहद महत्वपूर्ण है। यह कुरु वंश की राजधानी और कौरव-पांडवों से जुड़ा प्रमुख नगर था।

पौराणिक परंपराओं में हस्तिनापुर को भी दिव्य निर्माण कला से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में इसके निर्माण को लेकर विवरण एक समान नहीं हैं, इसलिए विश्वकर्मा द्वारा हस्तिनापुर बनाए जाने की बात को लोकप्रिय धार्मिक मान्यता के रूप में देखना उचित है।

5. अमरावती
Vishwakarma Puja 2026

पौराणिक कथाओं में अमरावती को देवराज इंद्र की राजधानी बताया गया है। इसे स्वर्गलोक की भव्य नगरी के रूप में वर्णित किया जाता है।

मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने देवताओं के लिए कई दिव्य भवन और संरचनाएं तैयार की थीं। अमरावती भी इसी दिव्य वास्तुकला की कल्पना से जुड़ी नगरी मानी जाती है। भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के महलों और दिव्य संरचनाओं के निर्माण से जोड़ने वाली परंपरा हिंदू धार्मिक साहित्य में दिखाई देती है।

भगवान विश्वकर्मा को क्यों कहा जाता है देवताओं का वास्तुकार?
Vishwakarma Puja 2026

भगवान विश्वकर्मा को भारतीय धार्मिक परंपरा में निर्माण, शिल्प और वास्तुकला का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथाओं में उन्हें केवल नगरों और महलों का निर्माता ही नहीं, बल्कि दिव्य अस्त्र-शस्त्रों के निर्माण से भी जोड़ा गया है।

मान्यताओं के अनुसार उन्होंने भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र, भगवान शिव के त्रिशूल और अन्य दिव्य अस्त्रों के निर्माण में भी भूमिका निभाई थी।

इसी वजह से विश्वकर्मा पूजा के दिन मशीनों, औजारों, वाहनों और कार्यस्थल की पूजा करने की परंपरा है। यह पर्व मेहनत, हुनर और निर्माण क्षमता के सम्मान का प्रतीक भी माना जाता है।

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17 सितंबर को मनाई जाएगी विश्वकर्मा पूजा
Vishwakarma Puja 2026

साल 2026 में विश्वकर्मा पूजा गुरुवार, 17 सितंबर को मनाई जाएगी। यह दिन कन्या संक्रांति के साथ पड़ रहा है। इस अवसर पर फैक्ट्रियों, दुकानों, वर्कशॉप, कार्यालयों और अन्य कार्यस्थलों पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाएगी।

निष्कर्ष

सोने की लंका से लेकर श्रीकृष्ण की द्वारका और इंद्रप्रस्थ तक, भगवान विश्वकर्मा से जुड़ी निर्माण कथाएं भारतीय पौराणिक परंपरा में विशेष स्थान रखती हैं। इन कथाओं में वास्तुकला, शिल्प, तकनीकी कौशल और रचनात्मकता की कल्पना दिखाई देती है। यही कारण है कि विश्वकर्मा पूजा आज भी उन लोगों के लिए खास पर्व है, जिनका जीवन निर्माण, तकनीक, मशीनों और हुनर से जुड़ा है।

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Author: Suryodaya Samachar

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