Sonbhadra news :- [ब्यूरो चीफ रामेश्वर सोनी] सोनभद्र ज़िले के चोपन थाना क्षेत्र के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र बेलक्ष ग्राम सभा के टोला अकेलवां से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। 29 वर्षीय युवक राम सागर गौड़, जो अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए पुणे (कोल्हापुर), महाराष्ट्र स्थित एक प्राइवेट कंपनी में काम करने गया था, उसकी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हो गई। युवक का जला हुआ शव उसके कमरे से बरामद हुआ, जिसे देखकर परिजनों का दिल दहल उठा। इस घटना ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है।
राम सागर वर्ष 2018 से महाराष्ट्र की एस मेंटल कंपनी में कार्यरत था और फरवरी 2025 में वह कुछ दिनों की छुट्टी लेकर अपने घर आया था। घर पर समय बिताने के बाद वह दोबारा काम पर लौट गया था। लेकिन 5 मई की रात को उसके साथियों को कमरे से जलने की बदबू आई, जिसके बाद उन्होंने देखा कि राम सागर का शरीर पूरी तरह से जला हुआ था। घटना की सूचना तत्काल न तो पुलिस को दी गई और न ही मृतक के परिजनों को। दो दिन बाद 7 मई को उसके साथियों ने फोन पर उसके घरवालों को मौत की सूचना दी।
परिजनों के अनुसार ठेकेदार और कंपनी प्रबंधन की लापरवाही स्पष्ट रूप से सामने आ रही है। ठेकेदार द्वारा न तो पुलिस को सूचित किया गया और न ही परिजनों को समय पर जानकारी दी गई। इससे परिजन बेहद आक्रोशित हैं और उन्होंने ठेकेदार पर राम सागर की हत्या कर शव को जलाने का आरोप लगाया है। घटना के बाद से ही ठेकेदार लापता है, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है।

परिजन किसी तरह पुणे पहुंचकर कंपनी के अधिकारियों और स्थानीय पुलिस से संपर्क कर शव को पोस्टमार्टम के बाद अपने खर्चे पर एम्बुलेंस से गांव लाए। जैसे ही गांव में राम सागर का शव पहुंचा, वहां कोहराम मच गया। राम सागर चार भाई–बहनों में सबसे छोटा और अविवाहित था। परिवार के आर्थिक हालात ठीक नहीं हैं, और राम सागर ही घर का इकलौता कमाने वाला सदस्य था।
गांव के लोगों और परिजनों ने इस मामले में जांच की मांग की है। उनका कहना है कि ठेकेदार की भूमिका संदिग्ध है और यदि पुलिस ईमानदारी से जांच करे तो हत्या की सच्चाई सामने आ सकती है। परिजनों ने चोपन थाने में तहरीर देकर ठेकेदार और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
इस घटना ने प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आज भी कई युवा रोजगार की तलाश में अपने घरों से दूर कंपनियों में काम करने को मजबूर हैं, जहां उनकी न तो सुरक्षा की गारंटी होती है और न ही अधिकारों की रक्षा।

राम सागर की मौत न सिर्फ एक परिवार की पीड़ा है, बल्कि एक सिस्टम की विफलता का प्रतीक भी है, जो देश के गरीब मजदूरों को सुरक्षा देने में नाकाम है। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए प्रशासन से निष्पक्ष और तेज़ जांच की मांग की है, ताकि दोषियों को सज़ा मिल सके और आगे से किसी और मजदूर के साथ ऐसा न हो।
Author: Suryodaya Samachar
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