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शिवपुर तालाब बचाओ संघर्ष: एक जन आंदोलन की मिसाल

वाराणसी से रिपोर्टर सुजीत सिंह की खास रिपोर्ट

शिवपुर तालाब बचाओ संघर्ष: वाराणसी के पावन पंचकोसी परिक्रमा मार्ग स्थित ऐतिहासिक शिवपुर तालाब की स्थिति आज एक बार फिर जनचेतना का विषय बन गई है। यह तालाब, जो सन् 1291 फसली से सार्वजनिक भू-स्वरूप में दर्ज है, अब निजी स्वार्थों और अवैध कब्जों की भेंट चढ़ता जा रहा है। शिवपुर मौजा में स्थित यह तालाब करीब 2.70 एकड़ क्षेत्रफल में फैला है, जो न केवल पर्यावरणीय दृष्टिकोण से बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सन् 2002 में जब कुछ लोगों द्वारा इस तालाब को पाटकर उस पर निर्माण की कोशिशें शुरू हुईं, तब क्षेत्रीय जनता ने इसके विरुद्ध जोरदार विरोध किया। नगर निगम, जिला प्रशासन और शासन स्तर पर भी आवाजें उठीं। संघर्ष और आंदोलन के फलस्वरूप यह मामला मा० उच्च न्यायालय तक पहुँचा और न्यायालय के आदेश पर एक चार-सदस्यीय समिति का गठन हुआ, जिसने स्पष्ट किया कि यह भूमि सार्वजनिक तालाब की है, जिस पर किसी भी प्रकार का स्वत्त्वधिकार मान्य नहीं हो सकता।

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इतिहास गवाह है कि टाउन एरिया कमेटी शिवपुर का 1924 में गठन हुआ था और सन् 1959 में यह नगर निगम वाराणसी में सम्मिलित कर लिया गया। तब से शिवपुर नगर निगम क्षेत्र का हिस्सा बना रहा है। तालाब की कानूनी स्थिति को बार-बार नगर निगम और प्रशासनिक दस्तावेजों में प्रमाणित किया गया है। यही नहीं, 2008 में जिलाधिकारी के आदेश पर शिवपुर थाना में तालाब पाटने वालों पर मुकदमा भी दर्ज हुआ था।

उल्लेखनीय है कि मा० मंडलायुक्त की अध्यक्षता में हुई तालाब संरक्षण समिति की बैठकों में तालाब की खुदाई और मूल स्वरूप में पुनर्स्थापना के निर्देश भी दिये गये थे। इस आदेश पर आंशिक खुदाई कर भीवाई गई, लेकिन बाद में प्रक्रिया थम गई।

इस संघर्ष में पूर्व पार्षद और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ० जितेंद्र सेठ का योगदान अविस्मरणीय रहा है। उन्होंने प्रलोभनों, दबावों और झूठे मुकदमों का डटकर सामना किया। हरदोई जिले में दर्ज फर्जी एफआईआर को लखनऊ हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से फाइनल रिपोर्ट लगाकर खत्म कराया गया। यह बताता है कि जो लोग तालाब को हड़पना चाहते हैं, वे किस हद तक जा सकते हैं।

आज भी शिवपुर तालाब नगर निगम की संपत्ति रजिस्टर, खसरा, नक्शा और 63 तालाबों की सूची में दर्ज है। हमारी मांग है कि इस तालाब की तत्काल खुदाई कर इसे मूल रूप में लाया जाए और इसका सुंदरीकरण हो ताकि यह भविष्य में जल संकट से निपटने में सहायक बन सके।

यह केवल एक भूखंड का मामला नहीं है, यह जल और पर्यावरण संरक्षण की लड़ाई है। शिवपुर वासियों के साथ यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक तालाब को उसका सम्मान और अस्तित्व वापस नहीं मिल जाता।

Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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