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Sheohar News :- भाजपा में राजपूतों की अनदेखी पर भड़के आशुतोष शंकर सिंह, कहा– राजपूत समाज आहत है, सम्मान न मिला तो बदल सकता है रुख

Sheohar News :- भाजपा के प्रदेश सह-कोषाध्यक्ष और युवा उद्यमी नेता आशुतोष शंकर सिंह ने राजपूत समाज की उपेक्षा को लेकर पार्टी नेतृत्व के प्रति तीखी नाराजगी जाहिर की है। एक प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि राजपूत समाज एनडीए और भाजपा के साथ पूरी ताकत से खड़ा है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सम्मानजनक पदों से वंचित किया जा रहा है।

“राजपूत समाज की अनदेखी भविष्य में पार्टी को भारी पड़ सकती है”

आशुतोष शंकर सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भाजपा अगर इसी तरह राजपूतों की अनदेखी करती रही, तो आने वाले समय में समाज खुद अपने भविष्य की दिशा तय करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यह स्थिति भाजपा के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।

“इतिहास गवाह है, राजपूतों ने हमेशा देश और समाज की सेवा की है”

उन्होंने कहा कि राजपूत समुदाय बहादुरी, पराक्रम और वफादारी का प्रतीक रहा है। आजादी से पहले शासक रहे इस समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी लगातार घटती जा रही है। वर्तमान में जब भाजपा के साथ खड़ा है, तब भी राजपूत समाज के नेताओं को केंद्रीय और राज्य सरकारों में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है।

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“तीन सांसद, फिर भी केंद्र में कोई मंत्री नहीं!”

उन्होंने बताया कि बिहार से भाजपा के तीन राजपूत सांसद होने के बावजूद किसी को केंद्र सरकार में मंत्री पद नहीं दिया गया। बिहार सरकार में भाजपा के 17 विधायक और 4 विधान परिषद सदस्य हैं, फिर भी उपमुख्यमंत्री या बड़े मंत्रालय का जिम्मा राजपूत समाज को नहीं मिला। केवल छोटे और कम प्रभावशाली विभाग देकर समाज की अनदेखी की जा रही है।

“स्वर्ण आयोग में भी उपेक्षा”

उन्होंने आगे बताया कि हाल ही में राज्य सरकार ने जो स्वर्ण आयोग गठित किया है, उसमें भी राजपूत समाज को अध्यक्ष पद से वंचित कर केवल सदस्य बना दिया गया है। इसके अलावा, पिछले तीन बार से प्रदेश महामंत्री जैसे प्रमुख पदों पर भी राजपूत नेताओं को जगह नहीं दी गई।

“वरिष्ठ राजपूत नेताओं से भी की अपील”

अपने बयान के अंत में आशुतोष शंकर सिंह ने राजपूत समाज के वर्तमान वरिष्ठ नेताओं से अपील करते हुए कहा कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से लें और पार्टी नेतृत्व से स्पष्ट बातचीत करें। उन्होंने यह भी कहा, “कहीं ऐसा न हो कि भविष्य में आपकी जयंती या पुण्यतिथि मनाने वाला भी कोई न बचे।”

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Author: Suryodaya Samachar

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