Putrada Ekadashi 2025 :- एकादशी तिथि का समापन 31 दिसंबर 2025 को सुबह 05:00 बजे होगा, जबकि पारण का समय सुबह 07:50 बजे के बाद माना जाएगा।
वैष्णव परंपरा के अनुसार पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत 31 दिसंबर 2025, बुधवार को रखा जाएगा। इसी कारण वर्ष 2025 के अंतिम दिन भी एकादशी व्रत रहेगा।
पौष पुत्रदा एकादशी का पारण 31 दिसंबर को दोपहर 01:29 बजे से 03:33 बजे के बीच करना शुभ माना गया है। इस समय भगवान विष्णु को तिल, पंचामृत, तुलसी पत्र और फल अर्पित कर व्रत का समापन करना उत्तम फलदायी होता है।
शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है और यह ध्यान रखना आवश्यक होता है कि पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले ही हो जाए। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाए, तो भी पारण सूर्योदय के बाद ही किया जाता है।
एक महत्वपूर्ण नियम यह भी है कि हरि वासर के दौरान पारण नहीं करना चाहिए। हरि वासर, द्वादशी तिथि की पहली एक-चौथाई अवधि होती है, इसलिए इसके समाप्त होने के बाद ही व्रत खोलना शास्त्रसम्मत माना गया है। यदि किसी कारणवश प्रातःकाल पारण संभव न हो, तो मध्याह्न के बाद पारण किया जा सकता है।
कभी-कभी एकादशी व्रत दो लगातार दिनों तक पड़ता है। ऐसी स्थिति में स्मार्त परंपरा को मानने वाले श्रद्धालु पहले दिन व्रत करते हैं, जबकि दूसरे दिन की एकादशी को दूजी एकादशी कहा जाता है। संन्यासी, विधवाएं और मोक्ष की कामना रखने वाले भक्त दूजी एकादशी के दिन व्रत करते हैं। जब भी दो दिन एकादशी होती है, तब वैष्णव एकादशी और दूजी एकादशी एक ही दिन मानी जाती है।
पौष पुत्रदा एकादशी पारण का विशेष समय
31 दिसंबर 2025 को व्रत रखने वालों के लिए पारण का शुभ समय दोपहर 01:26 बजे से 03:31 बजे तक रहेगा। वहीं, जो श्रद्धालु 31 दिसंबर को व्रत रखेंगे, वे इसका पारण 1 जनवरी 2026 को भी कर सकते हैं। उस स्थिति में पारण का शुभ समय सुबह 07:14 बजे से 09:18 बजे तक रहेगा।
इस प्रकार, वर्ष 2025 के दोनों अंतिम दिन एकादशी तिथि के अंतर्गत रहेंगे और भक्तों के लिए यह समय विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है।
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Author: Suryodaya Samachar
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