
Packed Food :- भारत में पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर पोषण संबंधी चेतावनी लेबल लगाने के प्रस्ताव को लेकर बहस तेज हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ बड़ी खाद्य कंपनियां भारत में ऐसे लेबलिंग नियमों का विरोध कर रही हैं, जबकि इन्हीं कंपनियों के उत्पादों पर कई पश्चिमी देशों में स्वास्थ्य संबंधी चेतावनियां या स्पष्ट पोषण जानकारी दी जाती है।
क्या है चेतावनी लेबल?
पैकेट के सामने लगाए जाने वाले चेतावनी लेबल का उद्देश्य उपभोक्ताओं को यह आसानी से बताना है कि किसी खाद्य उत्पाद में चीनी, नमक या संतृप्त वसा की मात्रा अधिक है या नहीं। इससे ग्राहक खरीदारी के समय पोषण संबंधी जानकारी को जल्दी समझ सकते हैं।
कंपनियों के विरोध से क्यों बढ़ी बहस?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का तर्क है कि भारत में मोटापा, डायबिटीज और अन्य गैर-संचारी बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच उपभोक्ताओं को खाद्य उत्पादों की पोषण संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से मिलनी चाहिए। वहीं, खाद्य उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि लेबलिंग के नियम वैज्ञानिक आधार और उचित मानकों पर तैयार किए जाने चाहिए।
पश्चिमी देशों में अलग रुख क्यों?
विरोध को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर कुछ कंपनियां दूसरे देशों में फ्रंट-ऑफ-पैक पोषण संबंधी जानकारी या चेतावनी व्यवस्था स्वीकार करती हैं, तो भारत में इसी तरह के नियमों को लेकर आपत्ति क्यों जताई जा रही है।
यह बहस सिर्फ खाद्य कंपनियों और सरकार के बीच नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और उन्हें सही जानकारी देने के अधिकार से भी है।
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Author: Suryodaya Samachar
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