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ओड़हथा गांव में विकास नहीं, केवल दिखावा: जन समस्याओं पर भारी चुप्पी

सोनभद्र (उत्तर प्रदेश):- सोनभद्र जनपद के घोरावल विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत ओड़हथा इस समय जन समस्याओं का एक जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। भले ही सरकार की ओर से ग्रामीण विकास एवं जनकल्याण के लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही हों, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आती है। गांव में व्याप्त समस्याएं इस कदर गहराती जा रही हैं कि आमजन अब शासन-प्रशासन से विश्वास खोता दिखाई दे रहा है।

गांव के लोगों का कहना है कि लंबे समय से हैण्डपम्पों की मरम्मत नहीं कराई गई है, जिससे पानी की भारी किल्लत हो रही है। जो हैण्डपम्प कभी गांव के कोने-कोने तक जल उपलब्ध कराते थे, आज उनमें से अधिकतर जंग खा चुके हैं या पूरी तरह से निष्क्रिय हो गए हैं। वहीं, कई हैण्डपम्पों के आसपास न प्लेटफार्म है और न ही जल निकासी की समुचित व्यवस्था। इससे कीचड़, गंदगी और बीमारियों का खतरा बना हुआ है।

इसके अलावा खड़ंजा निर्माण अधूरा है, कई मोहल्लों तक सड़क जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। बरसात के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जहां नालियों की सफाई न होने से जलजमाव आम समस्या बन चुकी है। नालियां टूट चुकी हैं या पूरी तरह जाम हैं, जिससे गंदा पानी सड़कों पर बहता है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि ग्राम पंचायत की ओर से अब तक किसी भी प्रकार की खुली बैठक नहीं कराई गई है। ग्रामीणों को न अपनी बात कहने का मंच मिला है, न ही उन्हें यह बताया गया कि सरकार की कौन सी योजनाएं उनके लिए चलाई जा रही हैं। इससे पारदर्शिता की पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो गई है।

ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यरत दर्जनों श्रमिकों की मजदूरी दो वर्षों से बकाया है। लाखों रुपये की राशि आज भी भुगतान की प्रतीक्षा कर रही है, जिससे श्रमिकों के परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। मनरेगा के अंतर्गत कार्य कर चुके कई मजदूरों का कहना है कि काम कराने के बाद उन्हें समय पर भुगतान नहीं किया गया और जब भी पूछताछ की जाती है, तो टालमटोल कर दिया जाता है।

ग्रामवासियों का यह भी आरोप है कि आवास योजना में भी भारी अनियमितता बरती गई है। पात्र लोगों को आवास नहीं मिला, जबकि अपात्रों को बिना किसी प्रक्रिया के लाभ दे दिया गया। इसके पीछे गहरे भ्रष्टाचार की बू आती है, जिससे गांव का विकास एक मज़ाक बनकर रह गया है।

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इतनी गंभीर समस्याओं के बावजूद जिम्मेदार ग्राम प्रधान और स्थानीय अधिकारी पूरी तरह से मौन हैं। ग्रामीणों ने कई बार इन समस्याओं को लेकर लिखित एवं मौखिक रूप से अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात। अब गांव का बुद्धिजीवी वर्ग प्रशासनिक अधिकारियों के घेराव की तैयारी में है और आने वाले दिनों में यह मामला बड़े स्तर पर आंदोलन का रूप ले सकता है।

इस पूरे परिदृश्य में यह साफ जाहिर होता है कि सरकारी योजनाएं भले ही कागजों पर सफल हों, लेकिन जब तक उन पर ईमानदारी से अमल नहीं होता, तब तक ओड़हथा जैसे गांव विकास की दौड़ में पिछड़ते ही रहेंगे। जरूरत है कि शासन-प्रशासन गंभीरता दिखाए और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करते हुए ग्रामीणों को उनके हक का लाभ दिलाए।

Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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