
Nirjala Ekadashi 2026 :- 25 जून को पड़ रही निर्जला एकादशी को सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।
सनातन धर्म में निर्जला एकादशी को सबसे महत्वपूर्ण और पुण्यदायी एकादशी माना जाता है। इस वर्ष यह व्रत 25 जून को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो श्रद्धालु पूरे वर्ष एकादशी व्रत नहीं कर पाते, वे यदि निर्जला एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करते हैं तो उन्हें सभी 24 एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।
इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त निर्जल रहकर उपवास करते हैं और जरूरतमंदों को जल, अन्न, वस्त्र तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करते हैं। माना जाता है कि इस व्रत से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
निर्जला एकादशी पर भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां
1. तामसिक भोजन का सेवन न करें व्रत से पहले और व्रत के दौरान लहसुन, प्याज, मांसाहार और नशे जैसी चीजों से दूरी बनाकर रखें।
2. क्रोध और विवाद से बचें धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मन को शांत रखना और सकारात्मक विचार रखना शुभ माना जाता है।
3. दान-पुण्य की अनदेखी न करें निर्जला एकादशी पर जल, फल, छाता, वस्त्र और अन्न का दान विशेष फलदायी माना गया है।
4. पूजा-पाठ में लापरवाही न बरतें भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और आरती करना शुभ माना जाता है।
5. व्रत का पारण सही समय पर करें द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक व्रत का पारण करना आवश्यक माना जाता है। गलत समय पर पारण करने से व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार निर्जला एकादशी केवल उपवास का पर्व नहीं, बल्कि आत्मसंयम, सेवा और श्रद्धा का प्रतीक भी है। इस दिन किए गए शुभ कार्यों का विशेष महत्व बताया गया है।
Author: Suryodaya Samachar
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