
Nepal flood :- नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने पूरे हिमालयी क्षेत्र को हिला दिया है। नेपाल में मृतकों की संख्या 768 तक पहुंच गई है, जबकि कुछ दिनों पहले चीन की ओर से तिब्बत में सिर्फ 5 मौतों की पुष्टि की गई थी। इस बड़े अंतर ने चीन की सूचना पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नेपाल में तबाही का बड़ा आंकड़ा
नेपाल में आपदा से भारी नुकसान हुआ है। सैकड़ों लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल मुश्किल परिस्थितियों में लोगों की तलाश कर रहे हैं।
यह आपदा ग्लेशियर के ढहने के बाद आई भीषण बाढ़ से जुड़ी बताई जा रही है। बाढ़ ने गांवों, सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है।
तिब्बत में सिर्फ 5 मौतों की पुष्टि क्यों?
चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी इसी आपदा का असर हुआ। शुरुआती दिनों में चीनी अधिकारियों ने 5 मौतों की पुष्टि की थी, जबकि सैकड़ों लोग लापता बताए गए थे। इस विरोधाभास के कारण सवाल उठे कि तिब्बत में नुकसान का वास्तविक आकलन आखिर कितना है।
IAS Divya Mittal :- IAS दिव्या मित्तल ने 13 साल की सेवा के बाद दिया इस्तीफा, फेसबुक पोस्ट के जरिए बताई वजह
हालांकि, 30 अगस्त तक उपलब्ध नई रिपोर्टों में चीन की ओर से आंकड़ा बदल चुका है। Reuters के मुताबिक चीन ने तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में 16 मौतों और 546 लोगों के लापता होने की पुष्टि की है। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि चीन का आधिकारिक आंकड़ा केवल 5 ही है।
चीन पर सूचना छिपाने के आरोप क्यों लगे?
तिब्बत चीन का बेहद संवेदनशील क्षेत्र है और वहां मीडिया तथा सूचनाओं के प्रवाह पर कड़े नियंत्रण की बात लंबे समय से सामने आती रही है। इस आपदा में भी स्वतंत्र पत्रकारों की पहुंच और स्थानीय स्तर की जानकारी सीमित रहने के कारण नुकसान का स्वतंत्र आकलन मुश्किल रहा।
इसी वजह से शुरुआती दौर में नेपाल से सामने आ रही विस्तृत जानकारी और चीन की ओर से जारी सीमित आंकड़ों के बीच बड़ा अंतर दिखाई दिया। हालांकि, कम आंकड़ा सामने आने का मतलब अपने आप यह साबित नहीं करता कि चीन जानबूझकर मौतों की संख्या छिपा रहा है। दुर्गम इलाका, संचार व्यवस्था का बाधित होना और राहत कार्य के दौरान शवों की पहचान जैसी वजहें भी आंकड़ों में देरी का कारण हो सकती हैं।
हजारों लोग अब भी लापता
सबसे बड़ी चिंता यह है कि नेपाल और तिब्बत दोनों तरफ अभी भी हजारों लोग लापता हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में मृतकों की संख्या बढ़ सकती है और आधिकारिक आंकड़े बदल सकते हैं।
यह त्रासदी एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की निगरानी, समय रहते चेतावनी प्रणाली और भारत-नेपाल-चीन के बीच आपदा संबंधी सूचनाओं के बेहतर आदान-प्रदान की जरूरत को सामने लाती है।
Archana Puran Singh :- समय रैना ने उड़ाया अर्चना पूरन सिंह की व्लॉगिंग का मजाक, मिला करारा जवाब- ‘गालियां देना टैलेंट है’
Author: Suryodaya Samachar
खबर से पहले आप तक






