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Moisturizer Bottle case :- युवती ने अपने प्राइवेट पार्ट में डाली मॉइस्चराइजर बोतल, तीन दिन बाद डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक निकाला बाहर

इस घटना के बाद युवती पेट में दर्द और दो दिनों से शौच न होने की समस्या हुई। जिसके बाद युवती की गंभीर हालत और आंत फटने की आशंका को देखते हुए उसे तुरंत रात में सर्जरी के लिए ले जाया गया।

Moisturizer bottle case :- निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने बिना सर्जरी किए सिग्मॉइडोस्कोपी की मदद से युवती की आंत में फंसी मॉइस्चराइजर की बोतल निकाली। यौन जिज्ञासा के कारण 27 साल की युवती ने बोतल को निजी अंग में डाला था, जो प्राइवेट पार्ट में फंस गई। इस घटना के बाद युवती पेट में दर्द और दो दिनों से शौच न होने की समस्या हुई। उसे निजी अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया। पूछताछ करने पर युवती ने बताया कि उसने यौन सुख की चाह में दो दिन पहले एक मॉइस्चराइजर की बोतल अपनी प्राइवेट पार्ट में डाली थी। युवती पहले अपने नजदीकी अस्पताल गई थी, जहां डॉक्टरों ने बोतल निकालने की कोशिश की लेकिन असफल रहे। इसके बाद उसका पेट का एक्स-रे किया गया, जिसमें बोतल प्राइवेट पार्ट के ऊपरी हिस्से में फंसी हुई दिखाई दी। युवती की गंभीर हालत और आंत फटने की आशंका को देखते हुए उसे तुरंत रात में सर्जरी के लिए ले जाया गया।

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सर्जरी टीम में डॉ. तरुण मित्तल, डॉ. आशीष डे, डॉ. अनमोल आहूजा, डॉ. श्रेयष मंगलिक और एनेस्थेटिस्ट डॉ. प्रशांत अग्रवाल शामिल थे। सिग्मॉइडोस्कोपी की मदद से बोतल को सफलतापूर्वक बाहर निकाला गया। इस प्रक्रिया से पेट या आंत को नहीं काटना पड़ा, जिससे मरीज को कम दर्द और जल्दी ठीक होने में मदद मिली।

पूरी बोतल को सुरक्षित निकाल लिया गया और मरीज की हालत में सुधार होने पर उसे अगले दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉ. अनमोल आहूजा ने कहा कि ऐसे मामलों में समय बर्बाद किए बिना प्रक्रिया करना जरूरी होता है। इससे आंत फटने का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि एंडोस्कोपी, सिग्मॉइडोस्कोपी और लैप्रोस्कोपी जैसी मिनिमल इनवेसिव तकनीकों से इनका इलाज सुरक्षित रूप से किया जा सकता है।

डॉ. तरुण मित्तल ने बताया कि अक्सर ऐसे मरीज अकेलापन महसूस करते हैं, और उपचार के दौरान इस पहलू का भी ध्यान रखना चाहिए। ऐसे मरीज यदि मनोरोग से ग्रसित हैं तो उनकी काउंसलिंग की जा सकती है।

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Author: Suryodaya Samachar

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