Mohan bhagvat :- नागपुर से एक अहम फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने मोहन भागवत को दी गई Z+ सुरक्षा के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया। अदालत ने इस याचिका को “प्रेरित” बताते हुए कहा कि इसे गंभीरता से नहीं लिया जा सकता।
⚖️ कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश श्रीचंद्रशेखर और जस्टिस अनिल एस किलोर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि:
याचिका में कोई ठोस सबूत नहीं हैं
यह वास्तविक जनहित से जुड़ी नहीं है
न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग किया गया है
📌 मामला क्या था?
यह याचिका ललन किशोर सिंह द्वारा दायर की गई थी, जिसमें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को दी गई Z+ सुरक्षा पर सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ता ने सुरक्षा व्यवस्था की वैधता पर संदेह जताया था, लेकिन अदालत को इसमें कोई ठोस आधार नहीं मिला।
🧾 कोर्ट का स्पष्ट संदेश
अदालत ने साफ किया कि बिना पर्याप्त साक्ष्य और वास्तविक जनहित के नाम पर दायर याचिकाओं को स्वीकार नहीं किया जा सकता। इससे न्यायिक समय और संसाधनों की बर्बादी होती है।
Author: Suryodaya Samachar
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