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Mirzapur News :- तहसीलदार के स्थानांतरण की मांग पर लालगंज के अधिवक्ताओं का न्यायिक कार्य से बहिष्कार

Mirzapur News :- तहसील न्यायालय में तहसीलदार तरुण प्रताप सिंह द्वारा गैर-हाजिर अधिवक्ताओं की 10 फाइलों को खारिज करने की घटना ने गुरुवार को तहसील में भारी विवाद खड़ा कर दिया। अधिवक्ताओं ने तहसीलदार के इस व्यवहार को अपमानजनक बताते हुए उनके स्थानांतरण की मांग की और न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया।

आक्रोशित अधिवक्ताओं का आंदोलन:

लालगंज तहसील में उपरौध अधिवक्ता समिति और विंध्य युवा अधिवक्ता समिति ने संयुक्त बैठक कर तहसीलदार के व्यवहार की कड़ी निंदा की। समिति अध्यक्ष राजकुमार पांडेय और धनेश्वर गौतम ने कहा कि तहसीलदार की कार्यशैली और रवैया न्यायिक प्रक्रिया के लिए बाधक बन रहा है। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जब तक तहसीलदार का स्थानांतरण नहीं होता, अधिवक्ता न्यायिक कार्य से पूरी तरह विरत रहेंगे और कोर्ट का बहिष्कार करेंगे।

प्रशासन को ज्ञापन सौंपने की तैयारी:

अधिवक्ताओं ने इस मामले को गंभीर बताते हुए राज्यसभा सांसद अरुण सिंह, मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को इसकी जानकारी देने का निर्णय लिया। उन्होंने प्रशासन से तत्काल कदम उठाने की मांग की है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह केवल व्यक्तिगत सम्मान का मामला नहीं है, बल्कि न्यायिक प्रणाली के गरिमा की रक्षा का सवाल है।

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आंदोलन की चेतावनी:

अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि अगर प्रशासन ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो वे और सख्त आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने कहा कि यह विरोध अधिवक्ताओं के अधिकारों और न्यायिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

तहसीलदार का पक्ष:

तहसीलदार तरुण प्रताप सिंह ने अधिवक्ताओं के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “हमारा मुख्य उद्देश्य शासन की मंशा के अनुसार लंबित मुकदमों का निपटारा करना है। सुबह 10:30 बजे मैं कोर्ट में मौजूद था, लेकिन कई अधिवक्ता समय पर उपस्थित नहीं हुए। अधिवक्ता जानबूझकर न्यायालय के कार्य में बाधा डालने का प्रयास कर रहे हैं।”

अधिवक्ताओं का संकल्प:

अधिवक्ताओं का मानना है कि तहसीलदार का स्थानांतरण न केवल उनकी समस्या का समाधान करेगा, बल्कि न्यायालय के सकारात्मक कार्य वातावरण को भी बहाल करेगा। उनका कहना है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक प्रशासन उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाता।

इस विवाद ने तहसील न्यायालय के कामकाज को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और कैसे न्यायिक व्यवस्था को सुचारु रूप से बहाल करता है।

 

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Author: Suryodaya Samachar

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