Metro In Dino movie review :- निर्देशक अनुराग बसु एक बार फिर रिश्तों की उलझनों और दिलों की कसक को पर्दे पर लाने की कोशिश करते हैं — इस बार ‘मेट्रो…इन डिनो’ के ज़रिए। यह फिल्म उनकी 2007 की सराही गई फिल्म ‘लाइफ इन ए… मेट्रो’ का आधुनिक उत्तराधिकारी मानी जा रही है, लेकिन यह हर पहलू में उस जादू को दोहराने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाती।
⭐ कहानी की झलक:
यह फिल्म महानगरों – मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और बैंगलोर – की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जहां कई किरदार आधुनिक प्रेम, पहचान की खोज और दिल टूटने जैसी जटिलताओं से जूझते दिखाई देते हैं।
फिल्म में दिखाए गए रिश्ते बेहद यथार्थवादी हैं — कोई शादी टूटने के कगार पर है, कोई अधूरे प्रेम में उलझा है, तो कोई अपनी यौनिकता और अकेलेपन से संघर्ष कर रहा है।
🎭 अभिनय और प्रदर्शन:
आदित्य रॉय कपूर और सारा अली खान की जोड़ी स्क्रीन पर फ्रेश लगती है लेकिन स्क्रिप्ट उन्हें ज़्यादा कुछ करने का मौका नहीं देती।
कोंकणा सेन शर्मा और फातिमा सना शेख अपनी भूमिकाओं में डूबी नजर आती हैं — खासकर कोंकणा, जो भावनात्मक दृश्यों में बाज़ी मार लेती हैं।
पंकज त्रिपाठी और नीना गुप्ता फिल्म की आत्मा बनकर सामने आते हैं, और उनके सीन सच्चे अर्थों में दिल छूते हैं।
🎵 संगीत और निर्देशन:
अनुराग बसु की कहानियों की तरह ही इस फिल्म का संगीत भी एक अलग किरदार की तरह साथ चलता है। प्रीतम का संगीत और गीतों की सूक्ष्मता फिल्म के कुछ दृश्यों को प्रभावशाली बना देती है।
हालांकि, फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी असंगत स्क्रिप्ट है। कई कहानियां बीच में अधूरी लगती हैं और पात्रों के बीच कनेक्टिविटी की कमी महसूस होती है।
✅ क्या अच्छा है:
भावनात्मक गहराई और मानवीय रिश्तों की सच्चाई
दृश्यात्मक खूबसूरती और संगीत की गर्माहट
पंकज त्रिपाठी और नीना गुप्ता की शानदार मौजूदगी
❌ क्या खटकता है:
असमान पटकथा और कमजोर संपादन
कुछ कहानियों में ठहराव की कमी
क्लाइमैक्स में भावनात्मक संतुलन की कमी
📝 फाइनल वर्डिक्ट:
रेटिंग: ⭐⭐⭐✩✩ (3/5)
‘मेट्रो…इन डिनो’ एक संवेदनशील और दिल को छूने वाली फिल्म है, जो प्रेम और अकेलेपन की कहानियों को शहरी परिदृश्य में रखती है। हालांकि, यह अनुराग बसु की अन्य फिल्मों की तरह गहराई तक असर नहीं छोड़ती, फिर भी कुछ किरदारों और भावनात्मक दृश्यों के लिए यह फिल्म एक बार जरूर देखी जा सकती है।
Author: Suryodaya Samachar
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