Kovidara Tree :- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (25 नवंबर) को राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज की स्थापना को “सदियों पुराने घावों को भरने वाला क्षण” बताया। उन्होंने कहा कि आज भारत ही नहीं, बल्कि पूरा विश्व “राममय” हो चुका है, क्योंकि यह अवसर 500 वर्षों से संजोकर रखे गए एक सभ्यतागत संकल्प की पूर्णता का प्रतीक है।
इस ऐतिहासिक दिन ध्वजारोहण समारोह के दौरान मोदी ने उस ध्वज को फहराया, जिसमें सनातन धर्म के महत्वपूर्ण चिह्न — ओम, सूर्य और कोविदार वृक्ष — अंकित हैं। लेकिन कोविदार वृक्ष का महत्व क्या है? यहाँ जानिए पूरा विवरण।
कोविदार वृक्ष: धार्मिक महत्ता
राम मंदिर के 191 फुट ऊँचे शिखर पर फहराया गया भगवा धर्म ध्वज भगवान राम की दिव्यता, तेजस्विता और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। इस ध्वज पर मौजूद तीन मुख्य चिन्ह — ओम, सूर्य और कोविदार वृक्ष — सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र माने जाते हैं।
सूर्य : यह भगवान राम की सूर्यवंशी वंशावली का प्रतीक है।
ओम : सृष्टि के आदिकालीन नाद और ब्रह्म स्वरूप का प्रतिनिधित्व करता है।
कोविदार वृक्ष : मान्यता है कि यह मंदार और पारिजात के संयोग से बना एक अद्भुत वानस्पतिक रूप है, जिसकी रचना ऋषि कश्यप द्वारा की गई मानी जाती है। यह प्राचीन भारत की गहन वनस्पति-विज्ञान परंपरा का प्रतीक है।
सिर्फ एक ध्वज नहीं
ध्वजारोहण करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा—
“यह धर्म ध्वज केवल एक झंडा नहीं है। यह भारतीय सभ्यता के पुनरुत्थान का प्रतीक है। इस पर बना भगवा रंग, सूर्यवंश का चिन्ह, ‘ॐ’ का पवित्र स्वरूप और कोविदार वृक्ष — सब मिलकर रामराज्य की महिमा का प्रतिनिधित्व करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा—
“यह ध्वज एक संकल्प है, एक उपलब्धि है, संघर्ष से सृजन की कथा है। यह सैकड़ों वर्षों की तपस्या और संघर्ष का मूर्त रूप है। आने वाले हज़ारों वर्षों तक यह धर्म ध्वज संसार को प्रभु श्रीराम के आदर्शों का संदेश देता रहेगा — सत्य ही धर्म है, किसी के साथ भेदभाव नहीं, दुख से मुक्ति, शांति और समृद्धि। समाज में गरीबी न हो और कोई भी असहाय न रहे — यही रामराज्य का मार्ग है।”
Tata Sierra 2025 :- इंटीरियर की वास्तविक तस्वीरों में देखें पूरा केबिन, फीचर्स और प्रीमियम फील
Author: Suryodaya Samachar
खबर से पहले आप तक







