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India China dispute:– दलाई लामा के नाम पर पड़ा अरुणाचल प्रदेश की एक चोटी का नाम, तिलमिलाया चीन…

India China dispute:– भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। भारत ने अरुणाचल प्रदेश में एक चोटी का नाम छठे दलाई लामा के नाम पर रखने का फैसला किया है, जिसका चीन ने विरोध किया है।

भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर तनाव कोई नई बात नहीं है, लेकिन हालिया विवाद भारत द्वारा अरुणाचल प्रदेश की एक चोटी का नाम छठे दलाई लामा, त्सांगयांग ग्यात्सो, के नाम पर रखने के निर्णय से शुरू हुआ है। भारत के इस कदम पर चीन ने कड़ी नाराजगी जताई है। चीन अरुणाचल प्रदेश को अपने क्षेत्र “ज़ांगनान” का हिस्सा मानता है और इस क्षेत्र पर अपना दावा करता रहा है। चीन ने इस निर्णय को लेकर अपना विरोध दर्ज कराते हुए फिर से दावा किया है कि अरुणाचल प्रदेश उसका हिस्सा है।

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यह तनाव दोनों देशों के बीच दशकों पुराने सीमा विवाद का हिस्सा है। भारत हमेशा से अरुणाचल प्रदेश को अपना अभिन्न अंग मानता आया है, जबकि चीन इसे दक्षिणी तिब्बत कहकर अपनी संप्रभुता का दावा करता है। इस तरह की घटनाएं दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर तनाव को बढ़ा सकती हैं।

चोटी का नाम दलाई लामा पर ही क्यों..

अरुणाचल प्रदेश की जिस चोटी का नाम छठे दलाई लामा त्सांगयांग ग्यात्सो के नाम पर रखा गया है, उसके पीछे मुख्य कारण त्सांगयांग ग्यात्सो का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है। त्सांगयांग ग्यात्सो छठे दलाई लामा थे, जिनका जन्म 1682 में अरुणाचल प्रदेश के तवांग क्षेत्र में हुआ था, जिसे मोन तवांग क्षेत्र भी कहा जाता है। यह क्षेत्र भारत और तिब्बत के सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों का प्रतीक है।

रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाली राष्ट्रीय पर्वतारोहण एवं साहसिक खेल संस्थान (NIMS) की टीम द्वारा इस अनाम चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई करने के बाद, इसे छठे दलाई लामा के नाम पर रखने का निर्णय लिया गया। चोटी का नामकरण उनके बुद्धिमत्ता और योगदान के प्रति श्रद्धांजलि स्वरूप है। त्सांगयांग ग्यात्सो अपने काव्य, आध्यात्मिकता और जीवनशैली के लिए प्रसिद्ध थे, और उनका योगदान न केवल तिब्बत, बल्कि इस पूरे क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर में महत्वपूर्ण रहा है।

इस नामकरण से यह संदेश भी जाता है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का एक अभिन्न और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो भारत और तिब्बत के ऐतिहासिक संबंधों को भी रेखांकित करता है।

भारत का फैसला अमान्य बताया

अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत और चीन के बीच लंबे समय से सीमा विवाद चल रहा है। हाल ही में, जब भारत ने अरुणाचल प्रदेश की एक चोटी का नाम छठे दलाई लामा त्सांगयांग ग्यात्सो के नाम पर रखने का निर्णय लिया, तो चीन ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चीन अरुणाचल प्रदेश को अपने क्षेत्र “ज़ांगनान” का हिस्सा मानता है और भारत द्वारा यहां तथाकथित अरुणाचल प्रदेश को स्थापित करना अवैध और अमान्य है।

चीन का दावा है कि अरुणाचल प्रदेश दक्षिण तिब्बत का हिस्सा है, जिसे वह अपने क्षेत्र के रूप में देखता है। इसी आधार पर वह अरुणाचल प्रदेश को “ज़ांगनान” कहता है। दूसरी ओर, भारत हमेशा से ही चीन के इन दावों को खारिज करता आया है और अरुणाचल प्रदेश को देश का अभिन्न हिस्सा बताता है। भारत का यह रुख अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्पष्ट है कि अरुणाचल प्रदेश उसके राज्य का एक वैध हिस्सा है, और वहां के प्रशासनिक कार्य भारतीय संविधान के तहत होते हैं।

इस तरह के बयान दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में तनाव को और बढ़ा सकते हैं। हालांकि, भारत और चीन दोनों ही देश अपने-अपने दावों पर अडिग हैं, और इस क्षेत्रीय विवाद के चलते उनके बीच सैन्य और राजनीतिक तनाव की संभावना बनी रहती है।

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Author: Suryodaya Samachar

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