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“Golddar Hospital Baby Death” :- पिता झोले में नवजात की लाश लेकर पहुँचा SP ऑफिस, गोलदार हॉस्पिटल पर लापरवाही का आरोप

घटना जिसने झकझोर दिया लखीमपुर खीरी को

Golddar Hospital Baby Death :- लखीमपुर खीरी (U.P.) में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। महेवागंज स्थित गोलदार हॉस्पिटल की लापरवाही से नवजात शिशु की मौत हो गई। दुखी पिता अपने बच्चे की लाश झोले में रखकर SP ऑफिस पहुँचा और न्याय की गुहार लगाई। इस घटना से जिले में हड़कंप मच गया और लोगों में आक्रोश फैल गया।

गोलदार हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप

परिजनों का आरोप है कि हॉस्पिटल प्रशासन ने गुमराह कर इलाज के नाम पर पैसे वसूले, जबकि नवजात की हालत बिगड़ने के बाद भी कोई गंभीर कदम नहीं उठाया गया। मृतक शिशु के पिता ने बताया कि “हॉस्पिटल नियम-कानून ताक पर रखकर चल रहा था और डॉक्टरों ने समय पर सही इलाज नहीं किया।”

प्रशासन हरकत में – हॉस्पिटल सीज

घटना की जानकारी मिलते ही CMO और SDM सदर अश्विनी कुमार सिंह मौके पर पहुँचे। गहन जांच के बाद गोलदार हॉस्पिटल को तुरंत सीज कर दिया गया। हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों को सुरक्षित निकालकर जिला महिला अस्पताल भेजा गया। प्रशासन ने साफ कहा कि “लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

DM दुर्गा शक्ति नागपाल का सख्त संदेश

जिला अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने घटना का तुरंत संज्ञान लिया। उन्होंने आदेश दिया कि “खीरी का हर शख्स मेरा परिवार है, प्रशासन हर हाल में मदद करेगा।” उन्होंने नवजात की मां को बेहतर इलाज दिलाने की जिम्मेदारी खुद ली और कहा कि इलाज का पूरा खर्च जिला प्रशासन उठाएगा।

सृजन अस्पताल में जारी इलाज

नवजात की मां की हालत बिगड़ने पर उन्हें सृजन अस्पताल शिफ्ट किया गया। वहां ADM अनिल कुमार रस्तोगी खुद पहुंचे और प्रसूता का हालचाल लिया। डॉक्टरों ने बताया कि महिला की हालत अब स्थिर है और लगातार सुधार हो रहा है।

जांच के आदेश – दोषियों पर कार्रवाई तय

DM और CMO ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन ने साफ किया कि इस तरह की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

लखीमपुर खीरी की जनता में आक्रोश

इस घटना के बाद लखीमपुर खीरी में लोगों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि “निजी अस्पताल मरीजों से पैसा वसूलते हैं लेकिन जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह फेल रहते हैं।”

निजी हॉस्पिटलों की मनमानी पर सवाल

यह घटना एक बार फिर से प्राइवेट हॉस्पिटलों की लापरवाही और हेल्थकेयर सिस्टम की खामियों को उजागर करती है। लोगों का सवाल है:

  • क्या अब अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई होगी?
  • क्या हर जगह प्रशासन इसी तरह जिम्मेदारी दिखाएगा?
  • गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों का शोषण कब रुकेगा?

लखीमपुर खीरी का यह मामला सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं बल्कि पूरे हेल्थ सिस्टम के लिए बड़ा सवाल है। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करके अस्पताल को सीज कर मिसाल तो पेश की, लेकिन अब ज़रूरी है कि ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सख्त नियम और मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया जाए।

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Author: Suryodaya Samachar

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