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फौजा सिंह नहीं रहे: सड़क पर थमा एक शतकवीर का सफर, दुनिया ने खोया असली धावक

फौजा सिंह नहीं रहे: दुनिया के सबसे उम्रदराज मैराथन धावक और लाखों लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत फौजा सिंह अब इस दुनिया में नहीं रहे। सोमवार शाम जालंधर में एक तेज रफ्तार कार ने उन्हें उस वक्त टक्कर मार दी, जब वे रोज़ की तरह सैर पर निकले थे। हादसे के बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। 114 वर्ष की उम्र में, एक जीवन जो दौड़ते हुए बीता — आज अचानक रुक गया।

114 साल की उम्र, लेकिन जज़्बा 21 साल का

फौजा सिंह का नाम सुनते ही आंखों के सामने एक मुस्कुराता चेहरा और दौड़ते हुए कदमों की छवि उभरती है। उनका जीवन किसी चमत्कार से कम नहीं था। उन्होंने 89 साल की उम्र में अपनी पहली मैराथन दौड़ी थी — वो भी लंदन में! इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क, टोरंटो और हांगकांग जैसे कई शहरों में मैराथन पूरी की।उनकी फिटनेस, अनुशासन और नशामुक्त जीवनशैली उन्हें लाखों युवाओं से भी आगे रखती थी।

सड़क हादसा या सिस्टम की चूक?

फौजा सिंह जैसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित व्यक्ति के साथ इस तरह का हादसा न सिर्फ दुःखद है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि हमारी सड़कें, हमारी ट्रैफिक व्यवस्था और नागरिक जिम्मेदारियां कितनी लचर हैं। जब 114 साल का बुजुर्ग जो खुद अनुशासन की मिसाल था, सड़क पर सुरक्षित नहीं है, तो आम आदमी की सुरक्षा की क्या गारंटी है?

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प्रेरणा, जो अमर हो गई

फौजा सिंह ने सिख समुदाय, भारत और दुनियाभर के बुजुर्गों के लिए एक संदेश दिया — “उम्र सिर्फ एक संख्या है”। उन्होंने अपने जीवन से यह साबित किया कि आत्मविश्वास, अनुशासन और मेहनत से कोई भी सीमा पार की जा सकती है।

वह बिना किसी प्रोफेशनल ट्रेनिंग के सिर्फ परिश्रम और सकारात्मक सोच के बल पर वर्ल्ड आइकन बने। उनकी किताबें, डॉक्युमेंट्रीज़ और भाषण आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं।

सरकार और खेलजगत से अपेक्षाएँ

अब समय है कि भारत सरकार, खेल मंत्रालय और पंजाब सरकार फौजा सिंह के सम्मान में कोई स्थायी स्मृति बनाएं — चाहे वह राष्ट्रीय खेल पुरस्कार का नामकरण हो या एक स्टेडियम उनके नाम पर।

उनकी कहानी को स्कूलों में पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियाँ जान सकें कि “हीरो बनने के लिए उम्र नहीं, हिम्मत चाहिए होती है।”

फौजा सिंह चले गए, लेकिन उनका जीवन एक ऐसा दीपक है जो आने वाले समय तक कई लोगों को रोशनी देता रहेगा। उनकी अंतिम दौड़ भले ही पूरी हो गई हो, लेकिन उनका सफर आज भी लाखों दिलों में जारी है।

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Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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