Environmental protest :- भारत में तेजी से बढ़ रहे डेटा सेंटर निर्माण के बीच महाराष्ट्र के ठाणे और आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में स्थानीय निवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन परियोजनाओं से पर्यावरण और स्थानीय संसाधनों पर असर पड़ सकता है।
पर्यावरण और संसाधनों को लेकर चिंता
विरोध कर रहे लोगों का आरोप है कि बड़े डेटा सेंटरों के निर्माण और संचालन में भारी मात्रा में बिजली और पानी की आवश्यकता होती है। उनका कहना है कि इससे स्थानीय जल संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है और पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका है।
स्थानीय निवासियों ने उठाई पारदर्शिता की मांग
प्रदर्शनकारियों ने परियोजनाओं की पर्यावरणीय मंजूरी, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया और संभावित प्रभावों को लेकर अधिक पारदर्शिता की मांग की है। उनका कहना है कि स्थानीय समुदायों की राय को भी निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए।
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए डेटा सेंटर जरूरी हैं, लेकिन इनके निर्माण के दौरान पर्यावरण संरक्षण, जल प्रबंधन और स्थानीय समुदायों के हितों का भी समान रूप से ध्यान रखा जाना चाहिए।
Author: Suryodaya Samachar
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