CJI Surya Kant : CJI जस्टिस सूर्यकांत ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को मुलाकात का समय देने से इनकार कर दिया। पत्र में उन्होंने लंबित मामलों पर चर्चा को शक्तियों के बंटवारे और न्यायिक औचित्य के खिलाफ बताया तथा याचिका दायर करने का विकल्प दिया।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को मुलाकात का समय देने से इनकार कर दिया है। दोनों नेताओं ने 12 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश से मिलकर चुनाव आयोग, छात्रों की गिरफ्तारी, मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और ट्रेनों को रद्द किए जाने जैसे मुद्दों पर ज्ञापन सौंपने का अनुरोध किया था।
अपने जवाबी पत्र में CJI ने कहा कि इन मुद्दों से जुड़े मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। ऐसे में लंबित मामलों पर बैठक करके चर्चा करना शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत और न्यायिक औचित्य के अनुरूप नहीं होगा।
CJI Surya Kant : CJI ने पत्र में क्या कहा?
जस्टिस सूर्यकांत ने 11 अक्टूबर को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में पहले से विचाराधीन मामलों पर प्रशासनिक स्तर पर चर्चा करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि शक्तियों का बंटवारा भारतीय संविधान की मूल संरचना का अभिन्न हिस्सा है।

CJI के अनुसार, अदालत का काम कानून के तहत न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से मामलों पर विचार करना है। इसलिए विपक्षी नेताओं को प्रशासनिक स्तर पर ज्ञापन सौंपने के बजाय उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत याचिका दायर करनी चाहिए।
CJI Surya Kant : राहुल गांधी और खड़गे ने किन मुद्दों पर मांगी थी मुलाकात?
कांग्रेस नेताओं ने 10 अक्टूबर को CJI को पत्र लिखकर 12 अक्टूबर को शाम 4 से 5 बजे के बीच मिलने का समय मांगा था। वे जिन प्रमुख मुद्दों पर ज्ञापन देना चाहते थे, उनमें शामिल थे:
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त और भारतीय निर्वाचन आयोग से जुड़े मुद्दे।
- कई छात्रों की कथित मनमानी गिरफ्तारी।
- मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने का मामला।
- ट्रेनों को रद्द किए जाने से जुड़ी चिंताएं।
- मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और ‘वोट चोरी’ के आरोप।
विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को रोकने जैसी मांगें भी रखी हैं। ये विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप और मांगें हैं।
CJI Surya Kant : सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दायर करने का दिया विकल्प
CJI ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के पास नेताओं के पत्र में उठाए गए मुद्दों से निपटने के लिए प्रशासनिक अधिकार नहीं हैं। हालांकि, संविधान के अनुच्छेद 32 और न्यायिक समीक्षा की शक्तियों के तहत अदालत नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़े मामलों पर सुनवाई कर सकती है।

उन्होंने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को सुझाव दिया कि वे अपनी शिकायतों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत याचिका के रूप में पेश करें। पत्र के मुताबिक, याचिका सोमवार को सुबह 10:30 बजे से शाम 4:30 बजे के बीच सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से दाखिल की जा सकती थी। इसके अलावा ई-फाइलिंग का विकल्प भी उपलब्ध था।
CJI ने भरोसा दिलाया कि कानून के अनुसार ऐसी याचिका पर जल्द से जल्द सुनवाई की जाएगी।
CJI Surya Kant : 13 अक्टूबर को भी होनी थी संबंधित मामलों की सुनवाई
पत्र में जस्टिस सूर्यकांत ने उल्लेख किया कि इसी तरह के मुद्दों से जुड़े कुछ मामलों की सुनवाई मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को निर्धारित थी। ऐसे में उन्होंने नेताओं को उचित न्यायिक प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी।
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यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब INDIA गठबंधन के नेता चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से संबंधित आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की योजना बना रहे थे।
CJI Surya Kant : CJI की चिट्ठी का मुख्य संदेश
मुख्य न्यायाधीश के पत्र का सार यह है कि अदालत में लंबित मामलों पर प्रशासनिक बैठक के जरिए चर्चा करने के बजाय उन्हें निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया से उठाया जाना चाहिए। CJI ने मौलिक अधिकारों की रक्षा के प्रति सुप्रीम कोर्ट की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि नागरिक कानून के तहत अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
Author: Suryodaya Samachar
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