Mirzapur news: मीरजापुर। जिले के अहरौरा स्थित संयुक्त चिकित्सालय की बदहाल व्यवस्था को लेकर क्षेत्रीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लगभग 40 गांवों की आबादी के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों की शिकायतों के अनुसार, अस्पताल में कहीं साफ-सफाई का अभाव है तो कहीं मरीजों को जरूरी दवाओं के लिए बाहर जाना पड़ता है। डॉक्टरों की कथित अनुपस्थिति, खराब उपकरणों और अव्यवस्थित आपातकालीन सेवाओं के कारण गरीब एवं ग्रामीण परिवारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
Mirzapur news डॉक्टरों की अनुपस्थिति से मरीजों को परेशानी
स्थानीय स्तर पर सामने आ रही शिकायतों के मुताबिक, अस्पताल में डॉक्टरों की नियुक्ति होने के बावजूद उनकी नियमित उपस्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ चिकित्सक मनमाने तरीके से अस्पताल आते-जाते हैं, जिससे मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। विशेष रूप से चर्म रोग विशेषज्ञ को लेकर शिकायत है कि नियुक्ति के बाद वह कथित तौर पर केवल एक दिन अस्पताल पहुंचे थे और वह भी मेडिकल प्रमाणपत्र तैयार करने के सिलसिले में।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में छह डॉक्टरों की नियुक्ति होने के बावजूद मरीजों को अपेक्षित चिकित्सकीय सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और संबंधित चिकित्सकों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
Mirzapur news कंपाउंडर के सहारे चलने का आरोप, मरीजों को वाराणसी रेफर करने की शिकायत
अस्पताल में चिकित्सकों की कथित अनुपस्थिति के कारण मरीजों को उपचार के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार अस्पताल की व्यवस्था कंपाउंडर के सहारे संचालित होती है। मामूली चोट या सामान्य स्वास्थ्य समस्या से परेशान मरीजों को भी बेहतर इलाज की उम्मीद में वाराणसी का रुख करना पड़ता है।
दुर्घटना में घायल लोगों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। अहरौरा क्षेत्र से फोरलेन हाईवे गुजरने के कारण यहां सड़क दुर्घटनाओं में घायल मरीजों को तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में स्थानीय अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर, उपकरण और आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर उपचार नहीं मिलने और दूसरे शहर रेफर किए जाने से मरीजों तथा उनके परिजनों को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
Mirzapur news दवा वितरण और एंटी रेबीज इंजेक्शन को लेकर भी शिकायतें
अस्पताल में दवा वितरण की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति में भी दवाओं का वितरण किए जाने की शिकायत है। इसके अलावा, एंटी रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध कराने के बदले कथित तौर पर सुविधा शुल्क मांगे जाने के आरोप भी सामने आए हैं।
यदि इन शिकायतों की पुष्टि होती है, तो यह मरीजों के अधिकारों और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मामला होगा। सरकारी अस्पतालों में आवश्यक दवाओं और जीवनरक्षक उपचार की उपलब्धता सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है। ऐसे आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।
एक्स-रे मशीन होने के बावजूद मरीजों को लाभ नहीं
संयुक्त चिकित्सालय में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी चिंता का विषय बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अस्पताल में जनरेटर की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। एक्स-रे मशीन उपलब्ध होने के बावजूद उसके संचालित नहीं होने की शिकायत है। इससे उन मरीजों को परेशानी होती है जिन्हें चोट या बीमारी की जांच के लिए एक्स-रे की आवश्यकता पड़ती है।
अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड की स्थिति पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि वार्ड की देखभाल और व्यवस्थाओं में लापरवाही बरती जा रही है। पंखे खराब होने, बल्ब फ्यूज रहने और बेड पर गंदे बिस्तर होने जैसी समस्याओं की शिकायत भी स्थानीय लोगों ने की है। मरीजों के अनुसार, अस्पताल में साफ-सफाई और रखरखाव की नियमित निगरानी की आवश्यकता है।
महिला चिकित्सक की नियुक्ति नहीं होने से ग्रामीण महिलाएं परेशान
क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी एक अन्य महत्वपूर्ण शिकायत महिला चिकित्सक की अनुपलब्धता को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि लगभग तीन वर्ष पहले महिला चिकित्सक का स्थानांतरण होने के बाद से अब तक अहरौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नई महिला चिकित्सक की नियुक्ति नहीं की गई है।

इसका सबसे अधिक असर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं पर पड़ने की बात कही जा रही है। आरोप है कि महिला मरीजों को उचित चिकित्सकीय परामर्श नहीं मिल पाता और कुछ मामलों में स्टाफ नर्स द्वारा स्वयं को डॉक्टर बताकर बाहर की दवाएं लिखने तथा मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजने की शिकायतें भी हैं। इन आरोपों की जांच कर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मरीजों को योग्य चिकित्सकों से परामर्श मिले और सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से उपलब्ध हो।
गरीब परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है अहरौरा का अस्पताल
अहरौरा और आसपास के लगभग 40 गांवों के लोगों के लिए यह अस्पताल स्वास्थ्य सेवाओं का एक प्रमुख केंद्र है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए सरकारी अस्पताल में सस्ता और सुलभ उपचार किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। लेकिन यदि मरीजों को छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी दूसरे शहरों या निजी अस्पतालों में जाना पड़े, तो उनके ऊपर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ना स्वाभाविक है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलने से कुछ मरीज मजबूरी में निजी क्लीनिकों का सहारा लेते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल में डॉक्टरों की उपस्थिति, दवाओं की उपलब्धता, उपकरणों के संचालन और साफ-सफाई की व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए।
जिलाधिकारी से जांच और कार्रवाई की मांग
क्षेत्र के जैसराम बिन्द, राजा राम, कल्लू राम, महेश साहनी, मृत्युंजय कुमार, संतोष कुमार, बुधनी वनवासी, बंधन देवी, चंद्रो देवी, सरोज देवी, महदैया देवी, दुखरन प्रसाद, सुरेश कुमार, कोमल साहनी, मनवा देवी और सुखिया देवी सहित अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी मीरजापुर से मामले की जांच कराकर उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि अस्पताल में लंबे समय से ऐसी समस्याएं बनी हुई हैं, तो उनकी निगरानी और समाधान की जिम्मेदारी किसकी है। लोगों ने मांग की है कि अस्पताल में डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, महिला चिकित्सक की नियुक्ति की जाए, एक्स-रे मशीन को चालू कराया जाए तथा दवा वितरण और इमरजेंसी सेवाओं को व्यवस्थित किया जाए।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेते हैं। निष्पक्ष जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी। अहरौरा के लोगों को उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी जल्द कदम उठाएंगे, ताकि संयुक्त चिकित्सालय अपनी मूल जिम्मेदारी निभा सके और क्षेत्र के मरीजों को समय पर सुरक्षित एवं बेहतर उपचार मिल सके।
Author: Suryodaya Samachar
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