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Chinmay Sutar : पिता मुंबई के विस्फोटक बल्लेबाज, रोहित-सूर्या के साथ खेल चुके चिन्मय सुतार ने ठोके 400 रन, जानिए उनकी संघर्ष भरी कहानी

Chinmay Sutar : मिजोरम के बल्लेबाज चिन्मय सुतार ने नागालैंड के खिलाफ रणजी ट्रॉफी में 517 गेंदों पर नाबाद 400 रन बनाकर इतिहास रच दिया। जानिए मुंबई के पूर्व क्रिकेटर राजेश सुतार के बेटे चिन्मय की संघर्ष भरी कहानी और रोहित शर्मा-सूर्यकुमार यादव के साथ खेलने का अनुभव।

रणजी ट्रॉफी 2026-27 में मिजोरम के बल्लेबाज चिन्मय सुतार ने ऐसी पारी खेली है, जिसने उन्हें भारतीय घरेलू क्रिकेट के इतिहास में खास जगह दिला दी। नागालैंड के खिलाफ उन्होंने नाबाद 400 रन बनाकर तहलका मचा दिया। 29 साल के चिन्मय की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि वह मुंबई के लिए खेलने का सपना देखते रहे, लेकिन रेड-बॉल क्रिकेट में पर्याप्त मौके नहीं मिलने के बाद उन्होंने मिजोरम का रुख किया। उनके पिता राजेश सुतार भी मुंबई के पूर्व क्रिकेटर रहे हैं और सचिन तेंदुलकर के साथ ओपनिंग कर चुके हैं।

Chinmay Sutar : 517 गेंदों में नाबाद 400 रन, रणजी ट्रॉफी में बनाया इतिहास

चिन्मय सुतार ने नागालैंड के खिलाफ 517 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 400 रन बनाए। उनकी पारी में 46 चौके और 7 छक्के शामिल रहे। उनकी शानदार बल्लेबाजी के दम पर मिजोरम ने 9 विकेट पर 581 रन बनाकर पारी घोषित की।

इस उपलब्धि के साथ चिन्मय रणजी ट्रॉफी के इतिहास में 400 या उससे अधिक रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज बन गए। उनसे पहले 1948-49 के सीजन में बीबी निंबालकर ने महाराष्ट्र के लिए नाबाद 443 रन की ऐतिहासिक पारी खेली थी।

चिन्मय ने अपनी पारी के दौरान अंतिम विकेट के लिए लालरेमपुइया छकछुआक के साथ महत्वपूर्ण साझेदारी की। नंबर 11 पर बल्लेबाजी करने आए लालरेमपुइया ने 76 गेंदों पर नाबाद 14 रन बनाए और चिन्मय को बड़ा स्कोर बनाने में मदद की।

Chinmay Sutar : कौन हैं चिन्मय सुतार?

चिन्मय सुतार 29 वर्षीय बल्लेबाज हैं, जिनका संबंध महाराष्ट्र के मुंबई महानगर क्षेत्र से है। उन्होंने बचपन से ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। वह मुंबई की अंडर-23 और अंडर-25 टीमों का हिस्सा रह चुके हैं। उन्होंने अंडर-23 स्तर पर मुंबई की कप्तानी भी की थी।

चिन्मय ने 2019 में एसीसी इमर्जिंग टीम्स एशिया कप में भारत की ओर से खेलते हुए हांगकांग के खिलाफ शतक भी लगाया था। हालांकि, घरेलू क्रिकेट में लगातार बड़े अवसर हासिल करना उनके लिए आसान नहीं रहा।

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Chinmay Sutar : पिता राजेश सुतार भी थे मुंबई के आक्रामक बल्लेबाज

चिन्मय के पिता राजेश सुतार मुंबई के पूर्व क्रिकेटर हैं। वह अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते थे और मुंबई की ओर से प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सात मुकाबले खेल चुके हैं।

राजेश सुतार का नाम सचिन तेंदुलकर के साथ भी जुड़ा है। उन्होंने एक अभ्यास मुकाबले में सचिन के साथ पारी की शुरुआत की थी। ऐसे क्रिकेटिंग माहौल में पले-बढ़े चिन्मय को बचपन से ही खेल के प्रति लगाव रहा।

पिता का अनुभव और परिवार का समर्थन चिन्मय के क्रिकेट सफर में महत्वपूर्ण रहा है। ऐतिहासिक 400 रन की पारी के बाद भी उन्होंने अपने पिता को अपना बड़ा सहारा बताया।

Chinmay Sutar : रोहित शर्मा और सूर्यकुमार यादव के साथ भी खेल चुके हैं

चिन्मय सुतार मुंबई के घरेलू क्रिकेट ढांचे का हिस्सा रहे हैं। वह मुंबई की उस टीम के साथ भी रहे, जिसमें रोहित शर्मा, सूर्यकुमार यादव, श्रेयस अय्यर और शार्दुल ठाकुर जैसे खिलाड़ी शामिल थे।

 

हालांकि, मुंबई की मजबूत टीम में जगह बनाना चुनौतीपूर्ण था। उन्हें लगातार प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलने के मौके नहीं मिल पा रहे थे। यही वजह रही कि उन्होंने अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए दूसरे राज्य की टीम से खेलने का फैसला किया।

Chinmay Sutar : मुंबई छोड़कर मिजोरम क्यों गए चिन्मय?

चिन्मय का सपना मुंबई की रणजी टीम के लिए खेलना था, लेकिन उन्हें रेड-बॉल क्रिकेट में नियमित अवसर नहीं मिल रहे थे। ऐसे में उन्होंने मिजोरम की ओर से खेलने का मौका स्वीकार किया।

उनका यह फैसला करियर के लिहाज से अहम साबित हुआ। मिजोरम के लिए अपने शुरुआती रणजी मुकाबले में वह 99 रन बनाकर रन आउट हो गए थे। शतक से चूकने के बाद उनके पास अगले मैच में बड़ा स्कोर बनाने का मौका था, जिसे उन्होंने ऐतिहासिक 400 रन की पारी में बदल दिया।

चिन्मय ने माना कि वह लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहने और टीम के स्कोर में योगदान देने पर ध्यान दे रहे थे। उनका कहना रहा कि मुंबई में खेलते हुए उन्होंने धैर्य और लंबी पारियां खेलने का गुण सीखा।

Chinmay Sutar

Chinmay Sutar : टी20 मुंबई लीग में भी दिखा चुके हैं दम

रणजी ट्रॉफी में 400 रन बनाने से पहले चिन्मय टी20 मुंबई लीग में भी अपनी बल्लेबाजी का दम दिखा चुके हैं। वह मराठा रॉयल्स की टीम का हिस्सा रहे और पिछले सीजन में शानदार प्रदर्शन के कारण ऑरेंज कैप भी हासिल की थी।

सीमित ओवरों के क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद उनकी प्राथमिकता रेड-बॉल क्रिकेट में अपनी जगह बनाना थी। मिजोरम जाने के फैसले ने उन्हें प्रथम श्रेणी क्रिकेट में खुद को साबित करने का अवसर दिया।

Chinmay Sutar : आगे क्या है चिन्मय सुतार का लक्ष्य?

चिन्मय की यह पारी सिर्फ व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि घरेलू क्रिकेट में अवसर तलाश रहे खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा है। मुंबई जैसी मजबूत क्रिकेट व्यवस्था में जगह बनाने की चुनौती के बाद उन्होंने नए राज्य से खेलकर अपनी क्षमता साबित की।

अब उनकी नजर मिजोरम के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन करने और टीम को आगे बढ़ाने पर होगी। 400 रन की ऐतिहासिक पारी ने उनके करियर को नई पहचान दी है, लेकिन आगे भी नियमित प्रदर्शन करना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती रहेगी।

 

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Author: Suryodaya Samachar

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