Neha Bora Peace Bond : AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस के ₹10,000 के शांति बॉन्ड नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। जानिए BNSS की धारा 126 क्या है, शांति बॉन्ड कैसे काम करता है और इस मामले में नेहा बोरा ने क्या दलील दी है।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस की ओर से जारी शांति बॉन्ड नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। पुलिस ने उन्हें ₹10,000 का निजी मुचलका और एक जमानतदार पेश करने के लिए कहा था। नेहा बोरा ने इस कार्रवाई को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को रोकने की कोशिश बताया है। यह मामला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे प्रदर्शनों से जुड़ा है।
Neha Bora Peace Bond : क्या है BNSS की धारा 126?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 126 सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा लेने से संबंधित है। यदि कार्यकारी मजिस्ट्रेट को जानकारी मिलती है कि किसी व्यक्ति से शांति भंग होने या सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की आशंका है और कार्रवाई के पर्याप्त आधार हैं, तो वह उस व्यक्ति को कारण बताने के लिए बुला सकता है कि उससे शांति बनाए रखने का बॉन्ड क्यों न भरवाया जाए।
इस प्रावधान के तहत शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड की अवधि अधिकतम एक वर्ष तक हो सकती है। यह एक निवारक कानूनी प्रक्रिया है, किसी व्यक्ति को अपराध का दोषी घोषित करने वाली सजा नहीं।
Neha Bora Peace Bond : क्या होता है शांति बॉन्ड?
शांति बॉन्ड एक तरह का कानूनी आश्वासन है, जिसमें संबंधित व्यक्ति निर्धारित अवधि के दौरान शांति बनाए रखने का वादा करता है। इसका उद्देश्य संभावित विवाद या शांति भंग होने की स्थिति को रोकना है।
इस प्रक्रिया में संबंधित व्यक्ति को नोटिस देकर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है। बॉन्ड की राशि और शर्तें संबंधित कानूनी आदेश पर निर्भर करती हैं। नोटिस मिलना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है।
Neha Bora Peace Bond : नेहा बोरा को क्यों मिला नोटिस?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 16 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च में शामिल होने जा रहीं नेहा बोरा को पुलिस ने हिरासत में लिया था। यह मार्च कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं की गिरफ्तारी और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध के संदर्भ में आयोजित किया जा रहा था।

पुलिस ने नेहा बोरा को 17 अक्टूबर की तारीख वाला नोटिस जारी किया, जिसमें उन्हें 19 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश होने और ₹10,000 के निजी बॉन्ड के साथ एक जमानतदार देने के संबंध में जवाब देने को कहा गया।
Neha Bora Peace Bond : नेहा बोरा ने हाईकोर्ट में क्या दलील दी?
नेहा बोरा की याचिका के अनुसार, पुलिस का नोटिस अस्पष्ट और तथ्यात्मक रूप से गलत है। उनका पक्ष है कि नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किस घटना, समय या परिस्थिति के आधार पर शांति भंग होने की आशंका जताई गई है।
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AISA ने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई का इस्तेमाल शांतिपूर्ण विरोध को दबाने के लिए किया जा रहा है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा की स्वतंत्रता तथा अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों का हवाला दिया गया है।
ये याचिकाकर्ता के आरोप और दलीलें हैं; इन पर अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है।
Neha Bora Peace Bond : दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई की स्थिति
19 अक्टूबर 2026 की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नेहा बोरा ने नोटिस रद्द करने और पुलिस को उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने से रोकने की मांग करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया। दशहरा अवकाश के कारण अदालत की नियमित सुनवाई प्रभावित थी और उनकी ओर से जल्द सुनवाई का अनुरोध किए जाने की खबर आई।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में याचिका पर अंतिम न्यायिक फैसला सामने नहीं आया है। मामले में आगे की स्थिति अदालत की कार्यवाही पर निर्भर करेगी।
Neha Bora Peace Bond : धारा 126 और लोकतांत्रिक विरोध का सवाल
धारा 126 का उद्देश्य संभावित शांति भंग को रोकना है। वहीं, शांतिपूर्ण विरोध और अपनी बात रखने का अधिकार भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे मामलों में यह देखना जरूरी होता है कि निवारक कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार हैं या नहीं और संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया गया है या नहीं।
नेहा बोरा का मामला इसी कानूनी और संवैधानिक बहस को सामने लाता है। अंतिम स्थिति अदालत के आदेश और मामले के तथ्यों से स्पष्ट होगी।
Author: Suryodaya Samachar
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