Assam rain updates :- पूर्वोत्तर भारत इस समय प्राकृतिक आपदा की चपेट में है। भारी बारिश के कारण असम, त्रिपुरा और मिजोरम जैसे राज्यों में बाढ़ और भूस्खलन ने कहर बरपाया है। असम में ब्रह्मपुत्र समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे हालात और भी गंभीर हो गए हैं। प्रशासन लगातार राहत कार्यों में जुटा है, लेकिन चुनौती बड़ी है क्योंकि प्रभावित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है।
असम में तबाही का मंजर
असम के 15 से अधिक जिलों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसी स्थिति बन चुकी है। गोलाघाट, धेमाजी, लखीमपुर, दरंग और कछार जैसे जिलों में हालात सबसे खराब हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 80,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हो चुके हैं और कई हजार लोग अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।
ब्रह्मपुत्र, जिया-भोरोलि, बेकी और मानस नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। कई पुल और सड़कें बह चुकी हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों का संपर्क जिला मुख्यालयों से कट गया है। स्कूलों को बंद कर दिया गया है और परीक्षा स्थगित कर दी गई हैं।
भूस्खलन और मौतों की खबरें
भारी वर्षा के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं भी सामने आई हैं। असम और मिजोरम में अब तक कम से कम 8 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। त्रिपुरा के उनाकोटी और धनपुर जिलों में भी भूस्खलन ने जानलेवा रूप ले लिया है।
त्रिपुरा और मिजोरम में भी आफत
त्रिपुरा के धलाई, खोवाई और सिपाहीजाला जिलों में बाढ़ के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। निचले इलाकों में पानी भर चुका है और हजारों लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर चुके हैं। मिजोरम में लुंगलेई और आइजोल जिलों में कई घर क्षतिग्रस्त हुए हैं।
राहत और बचाव कार्य तेज
राज्य सरकारों ने एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से राहत कार्य शुरू कर दिए हैं। कई जिलों में नावों से लोगों को सुरक्षित निकाला जा रहा है। अस्थायी राहत शिविरों में पीने का पानी, राशन और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की जा रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
स्कूल और यातायात प्रभावित
असम और त्रिपुरा में स्कूलों को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। रेलवे सेवाओं पर भी असर पड़ा है — कई ट्रेनें रद्द या डायवर्ट की गई हैं। सड़क परिवहन बाधित है, जिससे जरूरी सामग्रियों की आपूर्ति में भी परेशानी आ रही है।
नागरिकों से अपील
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें, जरूरी सावधानियां बरतें और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें। जिन क्षेत्रों में रेड अलर्ट जारी किया गया है, वहां लोगों से तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
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पूर्वोत्तर भारत में बारिश और बाढ़ ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति तैयारी कितनी जरूरी है। प्रशासन राहत कार्यों में लगा हुआ है, लेकिन असली चुनौती अब प्रभावित लोगों के पुनर्वास और संक्रमण से बचाव की है। आम जनता और सरकार दोनों को मिलकर इस आपदा का सामना करना होगा।
Author: Suryodaya Samachar
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