Apara Ekadashi 2025:- अपरा एकादशी व्रत बहुत फलदायी माना जाता है। इस साल यह 23 मई को रखा जाएगा। यह दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है और इस दिन भगवान शिव की पूजा भी होती है। कहते हैं कि अपरा एकादशी का व्रत करने से सभी कष्टों का नाश होता है और पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
पूजन का शुभ मुहूर्त
तिथि: 23 मई 2025 (शुक्रवार)
एकादशी तिथि प्रारंभ: 22 मई को रात्रि 09:12 बजे
समाप्ति: 23 मई को रात्रि 07:31 बजे
अपरा एकादशी पर भगवान शिव की पूजा विधि:
1. प्रातः काल स्नान करें:
सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। स्नान में गंगा जल मिलाना शुभ माना जाता है।
2. व्रत का संकल्प लें:
शिवजी और विष्णुजी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें – “मैं अपरा एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करूंगा।”
3. शिवलिंग की पूजा करें:
शिवलिंग को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं। फिर बेलपत्र, धतूरा, भस्म, दूध, दही, शहद, घी और गन्ने का रस अर्पित करें।
4. शिवलिंग पर चढ़ाएं ये चीजें:
बेलपत्र: शिवजी को अत्यंत प्रिय है।
दूध: शुद्ध गाय का दूध शिवलिंग पर अर्पित करें।
शहद और दही: यह स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि का प्रतीक है।
भस्म: शिव तत्त्व का प्रतीक मानी जाती है।
सफेद फूल: जैसे आक, कनेर या चमेली शिव जी को प्रसन्न करते हैं।
धूप-दीप जलाएं: दीपक में तिल का तेल प्रयोग करें।
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5. मंत्र जप करें:
“ॐ नमः शिवाय” का जाप कम से कम 108 बार करें।
विष्णु सहस्त्रनाम और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप भी करें।
6. भोग अर्पण करें:
फल, पंचामृत और मिष्ठान्न शिव जी को अर्पित करें।
7. आरती करें और कथा सुनें:
शिवजी की आरती करें और अपरा एकादशी व्रत कथा सुनें।
8. दिनभर व्रत रखें और रात्रि जागरण करें:
फलाहार करें और रात को भगवान का ध्यान करते हुए जागरण करें।
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विशेष लाभ
इस दिन शिवलिंग पर गंगाजल, दूध और बेलपत्र चढ़ाने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
माता लक्ष्मी प्रसन्न होकर घर में सुख-समृद्धि का वास करती हैं।
पुराने दोष और पापों का नाश होता है।
Author: Suryodaya Samachar
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