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Ahraura News:- अहरौरा में नववर्ष पूर्व संध्या पर भव्य कवि गोष्ठी का आयोजन, कविताओं ने बांधा श्रोताओं को

Ahraura News :- नववर्ष की पूर्व संध्या पर अहरौरा स्थित श्री भवन में एक भव्य एवं शानदार कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस साहित्यिक आयोजन में क्षेत्र के अनेक रचनाकार, कवि एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। कवियों द्वारा प्रस्तुत की गई ओजपूर्ण, हास्य एवं गंभीर रचनाओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कवि गोष्ठी की अध्यक्षता ज्योतिषाचार्य पं. चंद्रमौली त्रिपाठी ने की, जबकि संचालन वरिष्ठ पत्रकार हौसिला प्रसाद त्रिपाठी ने किया।
आतंकवाद के खिलाफ ओजस्वी कविता से हुई शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत कवि प्रमोद केशरी ‘अतुल’ ने “ऑपरेशन सिंदूर” विषय पर अपनी ओजस्वी रचना से की। उन्होंने कहा—
आसमान पे थूकने वाला, खुद ही मुंह की खायेगा।
बुरे कर्म का बुरा नतीजा, बेशक तू भी पायेगा।
आयत तुम कुरान की पढ़ लो, पढ़ लो चाहे कलमा,
बोये तुम बबूल अगर हो, तो आम कहां से आयेगा।
इन पंक्तियों ने श्रोताओं की सोई ऊर्जा को जागृत कर दिया और आतंकवाद के विरुद्ध एक सशक्त संदेश दिया।
इसके बाद उन्होंने नववर्ष पर आधारित अपनी दूसरी कविता प्रस्तुत की—
ले लो सब कुछ मेरा,
करो दिल से दूर अंधारा।
छू लो अम्बर को जाओ,
अब आया नया सबेरा।
इस रचना पर पूरा सभागार तालियों और “वाह-वाह” की गूंज से भर उठा।

भोजपुरी कविता ने दिलाया ठहाकों का दौर
इसके बाद डॉ. अरुण प्रकाश द्विवेदी ने अपनी भोजपुरी कविता सुनाकर श्रोताओं को खूब गुदगुदाया—
ए बाबू मुल्लर हो, चल अइह गांवे,
पंडित बतैले हंव, बुद्धे क फेर बा।
स्वास्थ रही अच्छा, पर शिक्षा में देर बा।

इस कविता ने ग्रामीण जीवन की झलक प्रस्तुत करते हुए लोगों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया।
गंभीर और हास्य कविताओं का सुंदर समन्वय
कवि अमरेश चंद्र पाण्डेय ने गंभीर भावों से भरपूर रचना प्रस्तुत की—
मन क्यों होता अधीर,
हृदय में धीर धरा।
जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।
संचालक हौसिला प्रसाद त्रिपाठी ने अपनी हास्यपूर्ण रचना से माहौल को और जीवंत कर दिया—
मैं जीवन में कुछ कर न सका,
देखा जब उनको घड़ी में,
कुछ नीली पीली साड़ी में।
उनकी सहज शैली और चुटीले वक्तव्यों पर श्रोता बार-बार ठहाके लगाते रहे।

अध्यक्षीय उद्बोधन ने मोहा मन
कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य पं. चंद्रमौली त्रिपाठी ने सभी को आशीर्वचन देते हुए कहा—
अर्श हो या फिर फर्श,
या हो कितना संघर्ष,
जीवन में सबके हो,
हर वक्त हर्ष ही हर्ष।
उनके इन शब्दों ने सभी को भावविभोर कर दिया।

सम्मान और सहभागिता
गोष्ठी में क्षेत्र के लगभग एक दर्जन कवियों ने काव्य पाठ किया। श्रोताओं में नीरज पाण्डेय, गोपाल दास गुप्ता, विजय शंकर तिवारी, पत्रकार आत्मा प्रसाद त्रिपाठी, विकास पाण्डेय, नंदलाल सिंह, दिनेश सिंह, चंद्रलोकी, जटाशंकर लाल श्रीवास्तव, सूर्यभान सिंह, कल्लू, शम्भू नाथ तिवारी सहित सैकड़ों साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।
कवि गोष्ठी शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक चली। श्रोता कभी खिलखिलाते रहे तो कभी गंभीर भावों में डूबते रहे। अंत में आयोजक द्वारा सभी कवियों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

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Author: Suryodaya Samachar

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