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Home » धर्म » 28 या 29 अगस्त कब रखा जाएगा अजा एकादशी का व्रत, जानिए राजा हरिश्चंद्र से कैसे जुड़ा है ये व्रत, क्या है पूजा विधि

28 या 29 अगस्त कब रखा जाएगा अजा एकादशी का व्रत, जानिए राजा हरिश्चंद्र से कैसे जुड़ा है ये व्रत, क्या है पूजा विधि

अजा एकादशी 2024:  का व्रत 28 या 29 अगस्त को रखा जाएगा। इसका निर्णय तिथि और उदयकाल के आधार पर किया जाता है। अधिकतर पंचांगों के अनुसार, **अजा एकादशी का व्रत 29 अगस्त 2024** को रखा जाएगा।

राजा हरिश्चंद्र और अजा एकादशी का संबंध:

अजा एकादशी व्रत का संबंध सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र से जुड़ा है। पौराणिक कथा के अनुसार, राजा हरिश्चंद्र ने अपने सत्य और धर्म की रक्षा के लिए सब कुछ खो दिया था। उन्होंने कठिन समय का सामना किया और अपने सत्य पर अडिग रहे। एक समय ऐसा आया जब उन्हें कोई उपाय नहीं सूझ रहा था। तब महर्षि वशिष्ठ ने उन्हें अजा एकादशी का व्रत रखने का परामर्श दिया। इस व्रत के प्रभाव से राजा हरिश्चंद्र को अपने सारे दुखों से मुक्ति मिली, और उन्हें अपने खोए हुए राज्य, परिवार, और मान-सम्मान को पुनः प्राप्त करने का अवसर मिला। यह व्रत मोक्ष प्राप्ति का मार्ग माना जाता है।

अजा एकादशी पूजा विधि:

अजा एकादशी व्रत को विधिपूर्वक करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसका पालन इस प्रकार किया जाता है:

1. स्नान और संकल्प: प्रातःकाल स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु की पूजा का मन में दृढ़ निश्चय करें।

2. भगवान विष्णु की पूजा: घर के मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। उन्हें पीले वस्त्र, फूल, चंदन, धूप-दीप अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और विष्णु भगवान की आराधना करें।

3. अजा एकादशी कथा: इस दिन अजा एकादशी की कथा सुनना या पढ़ना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह कथा राजा हरिश्चंद्र की कथा पर आधारित है, जो इस व्रत की महिमा को दर्शाती है।

4. भजन-कीर्तन: दिनभर भगवान विष्णु के भजन गाएं और कीर्तन करें। यह मन को शांति और आस्था प्रदान करता है।

5. रात्रि जागरण:  व्रत रखने वाले लोगों के लिए रात को जागरण करना शुभ माना जाता है। रातभर भगवान विष्णु के नाम का स्मरण और भजन-कीर्तन करना चाहिए।

6. व्रत पारण: द्वादशी तिथि को प्रातःकाल भगवान विष्णु की पूजा करके व्रत का पारण करें। व्रत तोड़ने के लिए अन्न या फल का सेवन किया जाता है।

अजा एकादशी का महत्व:

अजा एकादशी व्रत करने से व्यक्ति को अपने पापों से मुक्ति मिलती है और उसे मोक्ष प्राप्ति का मार्ग मिलता है। इस व्रत के प्रभाव से सभी प्रकार के कष्टों का निवारण होता है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।

अजा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसका पालन करने वाले व्यक्ति को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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