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आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की पीड़ा: 6 सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन

लखीमपुर खीरी से अनुज गुप्ता की विशेष रिपोर्ट

लखीमपुर खीरी — अखिल भारतीय आंगनवाड़ी कर्मचारी महासभा की ओर से जिले की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी वर्षों से उपेक्षित मांगों को लेकर प्रशासन को 6 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। इन कर्मचारियों ने अपनी जमीनी हकीकत और मौजूदा परिस्थितियों की कठिनाइयों को खुलकर सामने रखा। उनका कहना है कि सरकार की तमाम योजनाओं को जिम्मेदारी से लागू करने के बावजूद उन्हें आज भी मामूली मानदेय पर काम करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

कार्यकर्ताओं ने बताया कि वर्तमान में उन्हें केंद्र और राज्य सरकार मिलाकर मात्र ₹6000 प्रतिमाह का मानदेय दिया जा रहा है, जो महंगाई के इस दौर में पर्याप्त नहीं है। घर चलाना तो दूर, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य ज़रूरतों को पूरा करना भी कठिन होता जा रहा है। उन्होंने बताया कि जब वे हर योजना को जमीन पर उतारने में सबसे अहम भूमिका निभाती हैं, तो फिर उनके जीवन स्तर और अधिकारों की अनदेखी क्यों?

ज्ञापन में प्रमुख रूप से छह मांगों को सामने रखा गया है —

1. स्थायी नियुक्ति (परमानेंट स्टेटस): कार्यकर्ताओं की सबसे पहली मांग है कि उन्हें संविदा से हटाकर स्थायी कर्मचारी घोषित किया जाए, जिससे उन्हें नौकरी की सुरक्षा मिल सके।

2. प्रमोशन की व्यवस्था: वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को योग्यता के आधार पर पदोन्नति का लाभ मिलना चाहिए।

3. पेंशन और ग्रेच्युटी: सेवा समाप्ति के बाद उन्हें पेंशन और ग्रेच्युटी की सुविधा मिलनी चाहिए ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।

4. तकनीकी संसाधनों की सुविधा: पोषण ट्रैकर, एफआरएस सिस्टम और केवाईसी जैसी डिजिटल प्रक्रियाओं के लिए उन्हें तकनीकी उपकरण दिए जाएं, जो अभी या तो उपलब्ध नहीं हैं या खराब हो चुके हैं।

5. सटीक इंस्ट्रूमेंट्स की आपूर्ति: वजन और लंबाई मापने के लिए दिए गए उपकरण खराब हो चुके हैं, जिससे बच्चों का सही आकलन नहीं हो पा रहा।

6. साइबर जागरूकता: केवाईसी प्रक्रिया के दौरान लाभार्थियों को ओटीपी नहीं मिल पाता क्योंकि वे स्कैम या फ्रॉड के डर से सावधान रहते हैं, जिससे प्रक्रिया बाधित होती है। इसके लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाए।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने यह भी बताया कि उन्हें बिना संसाधनों के ही आधुनिक डिजिटल कार्यों का भार सौंप दिया गया है। मोबाइल फोन जो उन्हें पहले दिए गए थे, अब खराब हो चुके हैं। नए उपकरणों की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। सरकार की योजनाएं लागू करने की सबसे पहली कड़ी होने के बावजूद उनके साथ यह व्यवहार अन्यायपूर्ण है।

इन कार्यकर्ताओं ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी पीड़ा को समझेगी और जल्द से जल्द सकारात्मक निर्णय लेकर उन्हें उनका हक दिलाएगी। अगर उनकी मांगे नहीं मानी गईं, तो वे आंदोलन को और व्यापक रूप दे सकती हैं।

यह रिपोर्ट महज एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि उस संघर्ष की कहानी है जो देश की नींव कहे जाने वाले कर्मचारियों के जीवन में रोज घटित हो रही है। देश के विकास में उनकी भूमिका को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता, और अब वक्त है कि उनकी भी सुध ली जाए।

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Suryodaya Samachar
Author: Suryodaya Samachar

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